दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ एक सोशल मीडिया मज़ाक दो महीने में देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक बन गया है। “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) नाम की यह पार्टी न तो चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड है, न ही इसका कोई पारंपरिक ढांचा है फिर भी इसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स सत्तारूढ़ भाजपा से दोगुने हो चुके हैं। 20 जुलाई को इसी पार्टी के “चलो संसद” मार्च में पुलिस लाठीचार्ज, आंसू गैस और दर्जनों हिरासतें हुईं, जबकि समाजसेवी सोनम वांगचुक 23 दिन की भूख हड़ताल के बाद अस्पताल पहुंच गए। यहां पूरी टाइमलाइन, दावे, जवाबी दावे और फैक्ट-चेक एक साथ दिए जा रहे हैं।

CJP की शुरुआत कैसे हुई?

15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने बेरोज़गार युवाओं और कार्यकर्ताओं की तुलना “कॉकरोच” और “समाज के परजीवी” से करते हुए एक टिप्पणी की थी। यह टिप्पणी फर्जी वकालत डिग्री से जुड़े एक अवमानना मामले की सुनवाई में आई थी। अगले ही दिन, राजनीतिक रणनीतिकार और आम आदमी पार्टी के पूर्व सहयोगी अभिजीत दीपके ने X (पूर्व ट्विटर) पर “सभी कॉकरोचों के लिए एक मंच” बनाने का ऐलान कर दिया पात्रता रखी गई: बेरोज़गार, आलसी, हमेशा ऑनलाइन रहने वाले और “पेशेवर तरीके से गुस्सा निकालने में सक्षम” लोग।

यह मज़ाक वायरल हो गया। लॉन्च के 78 घंटे में इंस्टाग्राम पर 30 लाख फॉलोअर्स जुड़ गए, पांच दिन में यह आंकड़ा एक करोड़ पार कर गया, और मई अंत तक करीब दो करोड़ फॉलोअर्स के साथ CJP भाजपा के आधिकारिक अकाउंट से भी आगे निकल गई।

मकसद और मांगें क्या थीं?

शुरुआत में यह सिर्फ व्यंग्य था, लेकिन जल्द ही यह तीन असल मुद्दों का मुखौटा बन गया