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Samastipur News

बिहार बोर्ड (BSEB) डिवीज़न और ग्रेड कैलकुलेटर 2026

BSEB 10वीं और 12वीं (मैट्रिक/इंटर) के लिए प्रतिशत, ग्रेड और अपनी श्रेणी (First, Second, Third Division) चेक करने का सबसे सटीक ऑनलाइन टूल। यह टूल बिहार बोर्ड की आधिकारिक मार्किंग स्कीम पर आधारित है।

डेटा अवधि: 2026•स्रोत: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति•अंतिम अपडेट: 29 अगस्त 2026

त्वरित उत्तर (Quick Answer)

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में 500 अंकों में से न्यूनतम 300 अंक (60%) प्राप्त करने वाले छात्रों को प्रथम श्रेणी (First Division) दी जाती है। 225 अंक (45%) लाने पर द्वितीय श्रेणी (Second Division) और 150 अंक (30%) लाने पर तृतीय श्रेणी (Third Division) मिलती है। यदि कोई छात्र 150 से कम अंक लाता है, तो उसे अनुत्तीर्ण (Fail) माना जाता है। प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले छात्रों (विशेषकर लड़कियों और अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों) को बिहार सरकार द्वारा ₹10,000 से ₹25,000 तक की प्रोत्साहन राशि (स्कॉलरशिप) दी जाती है।

BSEB डिवीजन और ग्रेड कैलकुलेटर

मैट्रिक / इंटर 2024-25 | आधिकारिक BSEB ग्रेडिंग के अनुसार

BSEB रिजल्ट चेक लिंक्स

बिहार बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल पर अपना रोल नंबर और रोल कोड डालकर अपना विस्तृत रिजल्ट (मार्कशीट) चेक करें।

BSEB डिवीज़न सिस्टम और मार्किंग स्कीम 2026

बिहार बोर्ड (BSEB) में छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कुल 500 अंकों के आधार पर किया जाता है। छठे या अतिरिक्त विषय (Optional Subject) जैसे कि मैट्रिक में एडवांस मैथमेटिक्स या संस्कृत, के अंक डिवीज़न तय करने में तब तक नहीं जोड़े जाते हैं, जब तक कि छात्र किसी मुख्य विषय (Main Subject) में फेल न हो गया हो।

नीचे दी गई तालिका में बिहार बोर्ड द्वारा निर्धारित आधिकारिक डिवीज़न क्राइटेरिया (Division Criteria) दिया गया है। इसी क्राइटेरिया के आधार पर मार्कशीट में फर्स्ट, सेकंड या थर्ड श्रेणी छपकर आती है:

First Division (प्रथम)

अंक (500 में से):300 या अधिक अंक
प्रतिशत:60% या अधिक

Second Division (द्वितीय)

अंक (500 में से):225 से 299 अंक
प्रतिशत:45% से 59.9%

Third Division (तृतीय)

अंक (500 में से):150 से 224 अंक
प्रतिशत:30% से 44.9%

Fail (अनुत्तीर्ण)

अंक (500 में से):150 अंक से कम
प्रतिशत:30% से कम

फर्स्ट डिवीज़न (1st Division) पर मिलने वाली स्कॉलरशिप (प्रोत्साहन राशि)

बिहार सरकार अपने राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बालिकाओं/कमजोर वर्गों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए भारी मात्रा में स्कॉलरशिप देती है। इस योजना को 'मुख्यमंत्री बालक/बालिका प्रोत्साहन योजना' (Mukhyamantri Protsahan Yojana) के नाम से जाना जाता है:

  • मैट्रिक (10वीं) पास छात्रों के लिए: बिहार बोर्ड से प्रथम श्रेणी (1st Division) से पास होने वाले सभी जाति, धर्म और वर्ग (General, OBC, SC, ST) के छात्र-छात्राओं को ₹10,000 की नकद प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते (DBT के माध्यम से) दी जाती है। इसके अलावा, SC/ST वर्ग के जो छात्र द्वितीय श्रेणी (2nd Division) से पास होते हैं, उन्हें भी ₹8,000 दिए जाते हैं।
  • इंटर (12वीं) पास छात्राओं के लिए: बाल विवाह को रोकने और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' चलाई जा रही है। इसके तहत इंटर (12वीं) में किसी भी श्रेणी (1st, 2nd, या 3rd) से पास होने वाली सभी अविवाहित लड़कियों को सरकार की ओर से ₹25,000 की एकमुश्त सहायता राशि उनके बैंक खाते में भेजी जाती है।

विषयवार पासिंग मार्क्स नियम (Subject-wise Passing Marks Criteria)

छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल कुल 150 अंक ले आना ही काफी नहीं है; आपको प्रत्येक मुख्य विषय में अलग-अलग न्यूनतम पासिंग अंक (Passing Marks) भी प्राप्त करने होंगे। जिन विषयों में प्रैक्टिकल (Practical) परीक्षा होती है (जैसे विज्ञान या सामाजिक विज्ञान), उनमें थ्योरी (लिखित) और प्रैक्टिकल दोनों में अलग-अलग पास होना जरूरी होता है।

विषय का प्रकारकुल अंकपासिंग अंक
भाषा (हिंदी/अंग्रेजी/उर्दू)10030
गणित (Maths)10030
विज्ञान (Science) - Theory8024
विज्ञान (Science) - Practical2006
सामाजिक विज्ञान (SST) - Theory8024
सामाजिक विज्ञान (SST) - Practical2006

नोट: इंटरमीडिएट (12वीं) के विज्ञान संकाय (Science Stream) में भौतिकी (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) के प्रैक्टिकल अंक अलग-अलग होते हैं, लेकिन सभी में थ्योरी में 30% और प्रैक्टिकल में 40% अंक लाना अनिवार्य है।

ग्रेस मार्क्स (Grace Marks) और ग्रेस रूल्स (कृपांक नियम)

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) उन छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए ग्रेस मार्क्स की नीति भी अपनाती है, जो पास होने के बिल्कुल करीब आकर कुछ अंकों से चूक जाते हैं:

  • यदि कोई छात्र किसी एक विषय में फेल हो रहा है (जैसे मैथ में 28 नंबर आए जबकि 30 चाहिए), तो बोर्ड उसे अधिकतम 8% तक ग्रेस मार्क्स देकर पास कर सकता है।
  • यदि छात्र दो विषयों में फेल हो रहा है, तो प्रत्येक विषय में 4-4% तक ग्रेस मार्क्स दिए जा सकते हैं।
  • यदि कोई छात्र प्रथम श्रेणी (300 अंक) से केवल 1 या 2 अंक पीछे है (यानी 298 या 299 अंक), तो बोर्ड उसे 1-2 बोनस अंक (Grace) देकर फर्स्ट डिवीज़न में प्रमोट कर देता है। हालांकि, यह नियम राज्य स्तरीय टॉपर सूची (Topper List) में रैंक बढ़ाने के लिए काम नहीं आता।

कंपार्टमेंटल परीक्षा (Compartmental Exam) क्या है?

यदि कोई छात्र ग्रेस मार्क्स मिलने के बावजूद 1 या 2 विषयों में पूरी तरह से फेल हो जाता है, तो उसे निराश होने की आवश्यकता नहीं है। बिहार बोर्ड ऐसे छात्रों का 1 कीमती साल बचाने के लिए तुरंत (रिजल्ट जारी होने के लगभग 1-2 महीने बाद) "कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा" आयोजित करता है।

छात्र ऑनलाइन फॉर्म भरकर केवल उन 1 या 2 विषयों की परीक्षा दोबारा दे सकते हैं जिनमें वे फेल हुए हैं। यदि वे इस परीक्षा में पास हो जाते हैं, तो उन्हें नई मार्कशीट दी जाती है और वे उसी साल अगली कक्षा (कॉलेज या यूनिवर्सिटी) में एडमिशन ले सकते हैं। ध्यान रहे, 3 या उससे अधिक विषयों में फेल होने वाले छात्रों को कंपार्टमेंटल का लाभ नहीं मिलता; उन्हें अगले साल दोबारा सभी विषयों की परीक्षा देनी होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

BSEB परीक्षा में फर्स्ट डिवीज़न के लिए कितने अंक चाहिए?▼

बिहार बोर्ड 10वीं (मैट्रिक) और 12वीं (इंटर) की परीक्षा में फर्स्ट डिवीज़न (प्रथम श्रेणी) प्राप्त करने के लिए आपको 500 में से कम से कम 300 अंक (60%) प्राप्त करने होंगे।

बिहार बोर्ड में पास होने के लिए न्यूनतम कितने अंक चाहिए?▼

प्रत्येक मुख्य विषय में पास होने के लिए न्यूनतम 30 अंक आवश्यक हैं (थ्योरी और प्रैक्टिकल मिलाकर, जहां लागू हो)। कुल मिलाकर आपको 500 में से 150 अंक (30%) लाना अनिवार्य है।

क्या ग्रेस मार्क्स (Grace Marks) का प्रावधान है?▼

हाँ, बिहार बोर्ड छात्रों को अधिकतम 8% तक (एक विषय में) या 4-4% तक (दो विषयों में) ग्रेस मार्क्स देकर पास कर सकता है, यदि वे कुल पासिंग मार्क्स के बहुत करीब हों। साथ ही, फर्स्ट डिवीज़न से 1-2 नंबर पीछे रहने वालों को भी बोनस ग्रेस दिया जाता है।

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