प्रतिशत की गणना कैसे होती है? (How Percentage is Calculated)
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) पटना द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित की जाने वाली 10वीं (मैट्रिक) और 12वीं (इंटरमीडिएट) की बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों का मूल्यांकन मुख्य रूप से 5 विषयों के आधार पर किया जाता है। प्रत्येक विषय 100 अंकों का होता है, जिससे कुल पूर्णांक 500 (Total Marks) हो जाता है।
अपना प्रतिशत (Percentage) निकालने के लिए आपको एक बहुत ही सरल गणितीय सूत्र का उपयोग करना होता है। कई बार मार्कशीट में प्रतिशत नहीं लिखा होता, केवल श्रेणी (Division) दी गई होती है। ऐसे में यह टूल या गणितीय सूत्र आपके काम आता है:
उदाहरण 1: अगर आपको 500 में से 350 अंक मिले हैं, तो (350 ÷ 500) × 100 = 70% होगा।
उदाहरण 2: अगर किसी छात्र को 285 अंक मिले हैं, तो (285 ÷ 500) × 100 = 57% (2nd Division) होगा।
बिहार बोर्ड डिवीजन नियम (BSEB Division Criteria 2026)
रिजल्ट जारी होने पर मार्कशीट पर प्रतिशत नहीं, बल्कि सीधे श्रेणी (Division) लिखी होती है। बिहार बोर्ड ने डिवीजन तय करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं जो दशकों से चले आ रहे हैं:
| श्रेणी (Division) | न्यूनतम अंक (Out of 500) | प्रतिशत (%) |
|---|---|---|
| प्रथम श्रेणी (1st Division) | 300 से 500 अंक | 60% या अधिक |
| द्वितीय श्रेणी (2nd Division) | 225 से 299 अंक | 45% से 59.9% |
| तृतीय श्रेणी (3rd Division) | 150 से 224 अंक | 30% से 44.9% |
| अनुत्तीर्ण (Fail) | 149 अंक या उससे कम | 30% से कम |
प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले छात्रों (विशेषकर लड़कियों और SC/ST वर्ग) को बिहार सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि (Scholarship) भी दी जाती है, जो कि 10,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक हो सकती है।
ग्रेस मार्क्स पॉलिसी (BSEB Grace Marks Rules)
कई बार छात्र मात्र 1 या 2 अंक से फेल होने की कगार पर होते हैं या 1st डिवीजन से चूक रहे होते हैं। ऐसी स्थिति में बिहार बोर्ड अपनी "ग्रेस मार्क्स पॉलिसी" (Grace Marks Policy) का इस्तेमाल करता है ताकि छात्रों का भविष्य खराब न हो:
- यदि कोई छात्र किसी एक विषय में अधिकतम 8% अंकों से फेल हो रहा है, तो बोर्ड उसे ग्रेस देकर पास कर देता है।
- यदि छात्र दो विषयों में फेल हो रहा है, तो प्रत्येक विषय में अधिकतम 4% ग्रेस मार्क्स दिए जा सकते हैं।
- यदि किसी छात्र के कुल अंक 298 या 299 हैं (यानी 1st डिवीजन में 1 या 2 अंक कम हैं), तो बोर्ड उसे बोनस अंक देकर 300 (1st Division) कर देता है। लेकिन यह नियम केवल डिवीजन बदलने के लिए लागू होता है, टॉपर बनने के लिए नहीं।
अतिरिक्त विषय (Additional / Optional Subject) का क्या होता है?
बिहार बोर्ड में छात्र अंग्रेजी (मैट्रिक में) या अन्य किसी विषय को ऐच्छिक (Optional/Extra) के रूप में ले सकते हैं। बहुत से छात्रों को यह भ्रम होता है कि अतिरिक्त विषय का नंबर कैसे जुड़ता है।
नियम: अगर आप अपने 5 मुख्य विषयों (Main Subjects) में से किसी एक में फेल हो जाते हैं, लेकिन अतिरिक्त विषय में पास हैं, तो अतिरिक्त विषय के अंक उस फेल हुए मुख्य विषय की जगह ले लेते हैं और आपको पास घोषित कर दिया जाता है। हालांकि, अगर आप सभी 5 मुख्य विषयों में पास हैं, तो अतिरिक्त विषय के अंक कुल प्रतिशत (Total Percentage) में नहीं जोड़े जाते हैं। आपका कुल योग हमेशा 500 में से ही माना जाएगा।
स्क्रूटनी (Scrutiny) और कंपार्टमेंटल (Compartmental) परीक्षा
रिजल्ट आने के बाद यदि आपको लगता है कि आपके प्राप्त अंक आपकी उम्मीद और मेहनत से काफी कम हैं या कॉपी चेक करने में कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई है, तो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) आपको दो महत्वपूर्ण विकल्प देती है:
- स्क्रूटनी (Re-checking): रिजल्ट जारी होने के एक सप्ताह के भीतर आप प्रति विषय एक निश्चित फीस (लगभग 120 रुपये) देकर अपनी कॉपी दोबारा चेक करने (Scrutiny) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसमें केवल जोड़े गए अंकों (Totaling) की दोबारा जांच होती है, कॉपी पूरी तरह से दोबारा नहीं पढ़ी जाती।
- कंपार्टमेंटल एग्जाम: अगर आप 1 या 2 विषयों में फेल हो गए हैं, तो आपका पूरा एक साल बर्बाद न हो, इसके लिए बोर्ड तुरंत कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा आयोजित करता है। इसे पास करके आप इसी सत्र में अगली कक्षा में एडमिशन ले सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या अतिरिक्त विषय (Additional Subject) के अंक प्रतिशत में गिने जाते हैं?▼
आमतौर पर, बिहार बोर्ड में अतिरिक्त विषय के अंक कुल 500 अंकों के प्रतिशत में नहीं गिने जाते हैं। लेकिन यदि आप किसी मुख्य विषय में फेल हो जाते हैं और अतिरिक्त विषय में पास हैं, तो वह विषय मुख्य विषय की जगह ले लेता है।
फर्स्ट डिवीजन (1st Division) के लिए कितने अंक चाहिए?▼
बिहार बोर्ड मैट्रिक (10th) और इंटर (12th) परीक्षा में प्रथम श्रेणी (1st Division) प्राप्त करने के लिए आपको 500 में से कम से कम 300 अंक (60%) लाना अनिवार्य है।
मेरे 298 नंबर हैं, क्या मुझे फर्स्ट डिवीजन मिलेगा?▼
हां, बिहार बोर्ड की ग्रेस मार्क्स पॉलिसी के अनुसार, यदि कोई छात्र 1 या 2 अंक से फर्स्ट डिवीजन या पास होने से चूक रहा है, तो बोर्ड उसे बोनस (ग्रेस) अंक देकर प्रमोट कर देता है। इसलिए 298 या 299 अंक वाले छात्रों को मार्कशीट पर 300 अंक (1st Division) मिल जाते हैं।
