संसद के मानसून सत्र से पहले सियासत तेज हो गई है। आने वाले वक्त में भाजपा सरकार डीलिमिटेशन बिल को लाने की तैयारी कर रही है। इसी बीच TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करी है। ब्रयान का कहना है कि इतने बड़े मामले पर सभी राजनैतिक दलों से बात किए बिना आगे बढ़ना सही नहीं है।

ब्रायन का कहना है

डोरेक ब्रायन टीएमसी के सांसद हैं। आने वाले मानसून सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन करने की तैयारी कर रही जिसको लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच बताया जा रहा है कि टीएमसी सांसद ब्रायन परिसीमन को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने सभी पक्षों की राय और सहमति लेने के लिए कहा है।

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परिसीमन को लेकर चिंता क्यों

ब्रायन के कहा कि मानसून सत्र के लिए जारी सरकार के कार्य की सूची में परिसीमन को लेकर कोई जिक्र नहीं है। जिसके चलते विपक्ष में चिंता बढ़ गयी है। उन्होंने सरकार के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए कहा है कि सरकार कश्मीर के पुनर्गठन विधेयक को भी अचानक विधानसभा में पेश कर दिया था। जिसके चलते उन्होंने कहा कि सरकार को परिसीमन जैसे बड़े मुद्दे पर ऐसी रणनीति नहीं अपनानी चाहिए। उन्होंने हाल ही में 131वें संविधान संशोधन परिसीमन बिल का जिक्र करते हुए, दावा किया कि विधेयक दो तिहाई बहुमत हासिल न कर पाने के कारण खारिज हो गया था।

परिसीमन पर सवाल करना सही या गलत

परिसीमन को लेकर चल रहे विवाद को लेकर ब्रायन का कहना है कि अगर बिल पास हो जाता है तो नए प्रावधानों का सीधा असर गरीबों पर पड़ेगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि इसका सीधा असर कई सामाजिक संगठनों पर पड़ेगा जिसमें उन्होंने अनुच्छेद 19 और 26 के तहत अधिकारों पर सरकारी नियंत्रण होने की बात कही है। इस कानून के आने से ईसाई शैक्षणिक संस्थानों पर सरकार का सीधा नियंत्रण रहेगा जिससे बाहर से आने वाले चैरटी ट्रस्ट के पैसे पर सरकार अपनी नजर रख सकेगी। यही सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है परिसीमन के विरोध का।