आज 28 मई, गुरुवार को पूरे देश में Bakrid Mubarak 2026 का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। समस्तीपुर समेत बिहार की ईदगाहों और मस्जिदों में सुबह से ही नमाज़ियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग नए कपड़े पहनकर और सिर पर टोपी लगाकर ईदगाह पहुंचे, जहां सलामती और तरक्की की दुआ मांगी गई। नमाज़ के बाद कुर्बानी की परंपरा निभाई जा रही है।

समस्तीपुर की ईदगाहों में सुबह से जुटने लगे लोग

समस्तीपुर शहर, रोसड़ा, दलसिंहसराय, ताजपुर और वारिसनगर समेत कई इलाकों में सुबह से ही लोग ईदगाहों की ओर निकल पड़े। सफेद कुर्ता-पायजामा और टोपी पहने बच्चे, युवा और बुजुर्ग नमाज के लिए कतारों में दिखाई दिए। कई जगहों पर सुबह 7 बजे से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। जानकारी के मुताबिक अधिकांश ईदगाहों में सुबह 8 बजे से 9 बजे के बीच नमाज अदा की गई।

प्रशासन ने भी सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए थे। कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी। मस्जिदों के बाहर बच्चों में खास उत्साह देखा गया। कई परिवारों ने घर लौटकर कुर्बानी की रस्म निभाई और गरीबों में हिस्सा बांटा।

बकरीद क्यों मनाई जाती है, जानिए इसकी अहमियत

बकरीद यानी ईद-उल-अजहा का पर्व हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था की याद में मनाया जाता है। पैगंबर हजरत इब्राहिम ने सपने में अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी दी। अल्लाह ने उनकी साफ नीयत और समर्पण देखकर वहां एक मेमना भेज दिया और बेटे की जगह उसी की कुर्बानी हुई। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

इस्लामिक कैलेंडर के ज़ुल-हिज्जा महीने के 10वें दिन यह त्योहार मनाया जाता है। इसी दिन मक्का की हज यात्रा का भी समापन होता है। मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने कहा कि यह ईद सिर्फ जानवरों की कुर्बानी तक सीमित नहीं है। यह हमें अपनी इच्छाओं, घमंड और बुराइयों का त्याग करना भी सिखाती है।

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