OTT Platforms Rural Bihar: बिहार के गांवों में अब मनोरंजन और खबरें देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां लोग केवल टीवी और अखबार पर निर्भर रहते थे, वहीं अब मोबाइल फोन नया स्क्रीन बन चुका है। गया, समस्तीपुर, दरभंगा और सीवान जैसे जिलों में लोग YouTube, JioCinema और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर घंटों समय बिता रहे हैं। सस्ते इंटरनेट और स्मार्टफोन ने यह बदलाव गांव-गांव तक पहुंचा दिया है।
OTT Platforms ने बदल दी गांवों की शाम
कुछ साल पहले तक गांवों में शाम का मतलब टीवी के सामने पूरा परिवार होता था। किसी एक घर में टीवी रहती थी और आसपास के लोग वहीं इकट्ठा होकर सीरियल, क्रिकेट या फिल्म देखते थे। अब तस्वीर बदल चुकी है। गांव के युवा अपने मोबाइल पर अपनी पसंद का कंटेंट कभी भी देख लेते हैं।
आज बिहार के ग्रामीण इलाकों में लोग खेतों में काम करते समय भी वीडियो देखते हैं। बस या ट्रेन के सफर में भी मोबाइल स्क्रीन पर वेब सीरीज और न्यूज़ चलती रहती है। युवा दर्शकों को अब तय समय पर टीवी शो का इंतजार नहीं करना पड़ता। वे अपनी सुविधा के हिसाब से कंटेंट देखते हैं। इसी वजह से डिजिटल प्लेटफॉर्म की पकड़ तेजी से मजबूत हुई है।
मनोरंजन के साथ-साथ न्यूज देखने की आदत भी बदल रही है। अब कई लोग मोबाइल पर ही लाइव अपडेट और वीडियो रिपोर्ट देख लेते हैं। इससे गांवों में डिजिटल मीडिया की पहुंच पहले से कहीं ज्यादा बढ़ी है।
सौरभ ठाकुर, Samastipur News के संस्थापक हैं। वे बिहार के समस्तीपुर जिले से हैं और बीते कई वर्षों से डिजिटल मीडिया, SEO और वेब डेवलपमेंट में काम कर रहे हैं। उन्होंने खुद मेहनत करके यह हुनर सीखा है और आज समस्तीपुर व बिहार से जुड़ी खबरों को स्थानीय पाठकों तक पहुंचाने के लिए इस वेबसाइट को चलाते हैं।
ग्रामीण बिहार में डिजिटल बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण सस्ता इंटरनेट है। 4G नेटवर्क आने के बाद डेटा की कीमत काफी कम हुई। अब 200 से 300 रुपये में पूरा महीना इंटरनेट चल जाता है। इससे गांवों में वीडियो देखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी।
साथ में स्मार्टफोन भी सस्ते हुए। पहले अच्छे फोन खरीदना मुश्किल था लेकिन अब कम कीमत में बड़े स्क्रीन वाले फोन मिल जाते हैं। किसान, छात्र, दुकानदार और मजदूर तक के हाथ में स्मार्टफोन पहुंच चुका है।
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5G नेटवर्क का विस्तार भी धीरे-धीरे ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रहा है। इससे वीडियो स्ट्रीमिंग पहले से आसान हुई है। अब गांवों में लोग HD वीडियो और लाइव क्रिकेट मैच बिना रुकावट देखने लगे हैं। यही वजह है कि डिजिटल कंटेंट की मांग लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीण बिहार में सबसे ज्यादा लोकप्रिय प्लेटफॉर्म YouTube है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां फ्री में हर तरह का कंटेंट मिल जाता है। हिंदी, भोजपुरी, मैथिली और बज्जिका भाषा के वीडियो आसानी से उपलब्ध हैं।
गांवों की महिलाएं अब खाना बनाने, सिलाई और स्वास्थ्य से जुड़े वीडियो देखती हैं। छात्र पढ़ाई के वीडियो देखते हैं। किसान खेती और नई तकनीक की जानकारी लेते हैं। मनोरंजन के लिए भोजपुरी गाने और कॉमेडी वीडियो सबसे ज्यादा देखे जाते हैं।
Short videos का ट्रेंड भी गांवों तक पहुंच चुका है। युवा अब छोटे वीडियो फॉर्मेट को तेजी से पसंद कर रहे हैं। कई लोग खुद भी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। इससे गांवों में नए डिजिटल क्रिएटर्स तैयार हो रहे हैं।
समस्तीपुर बना डिजिटल बदलाव का नया उदाहरण
समस्तीपुर में OTT और डिजिटल मीडिया का असर साफ दिखाई देता है। रेलवे जंक्शन के आसपास के इलाकों में चाय दुकानों पर लोग मोबाइल में वीडियो देखते मिल जाते हैं। रोसड़ा, दलसिंहसराय, विभूतिपुर और पूसा जैसे इलाकों में इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
पूसा कृषि विश्वविद्यालय के आसपास के किसान अब YouTube से खेती की नई तकनीक सीख रहे हैं। कई कृषि वैज्ञानिक सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर किसानों को जानकारी देते हैं। इससे गांवों तक खेती से जुड़ी नई जानकारी तेजी से पहुंच रही है।
समस्तीपुर के कई युवा अब केवल दर्शक नहीं रहे। वे खुद YouTube चैनल और डिजिटल कंटेंट बना रहे हैं। भोजपुरी गाने, लोकल व्लॉग और खबरों के वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं। इससे जिले में डिजिटल रोजगार के नए मौके भी बन रहे हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने क्षेत्रीय भाषाओं को नई पहचान दी है। पहले भोजपुरी और मैथिली कंटेंट केवल लोकल चैनलों या CD तक सीमित था। अब यह मोबाइल पर हर समय उपलब्ध है।
भोजपुरी गाने और वेब सीरीज को करोड़ों व्यूज मिल रहे हैं। गांव के दर्शकों को अपनी भाषा में मनोरंजन मिल रहा है। इससे लोकगीत और क्षेत्रीय संस्कृति को भी नया मंच मिला है।
कई नए कलाकार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोकप्रिय हो रहे हैं। पहले जिन लोगों को टीवी पर मौका नहीं मिलता था, वे अब YouTube और दूसरे ऐप्स के जरिए दर्शकों तक पहुंच रहे हैं। यह बदलाव बिहार की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत कर रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा असर केबल टीवी पर पड़ा है। कई परिवार अब केबल कनेक्शन हटाने लगे हैं क्योंकि मोबाइल पर लगभग हर चीज उपलब्ध है। युवा पीढ़ी टीवी की बजाय फोन पर ज्यादा समय बिताती है।
हालांकि गांवों में अभी भी कई परिवार बड़े स्क्रीन पर साथ बैठकर कार्यक्रम देखना पसंद करते हैं। लेकिन नई पीढ़ी का झुकाव तेजी से मोबाइल मनोरंजन की तरफ जा रहा है। क्रिकेट मैच, फिल्में और न्यूज अब सीधे फोन पर देखे जा रहे हैं।
JioCinema जैसे प्लेटफॉर्म ने लाइव क्रिकेट और बड़े शो फ्री में दिखाकर ग्रामीण दर्शकों को तेजी से जोड़ा है। इससे डिजिटल देखने की आदत और मजबूत हुई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं। बिहार के गांवों में पढ़ाई और जानकारी का बड़ा माध्यम भी बन चुके हैं। UPSC, BPSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र ऑनलाइन वीडियो लेक्चर देखते हैं।
कोरोना के दौरान गांवों में पढ़ाई जारी रखने में YouTube ने बड़ी भूमिका निभाई थी। जहां अच्छे कोचिंग संस्थान नहीं हैं वहां मोबाइल ही नया शिक्षक बन गया है।
खेती, सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य और रोजगार की जानकारी भी अब वीडियो के जरिए गांवों तक पहुंच रही है। इससे लोगों में डिजिटल जागरूकता बढ़ रही है और जानकारी तक पहुंच आसान हुई है।
ग्रामीण बिहार में इंटरनेट पहुंच बढ़ी है लेकिन कई समस्याएं अभी भी मौजूद हैं। दूरदराज गांवों में नेटवर्क कमजोर रहता है। कई जगह बिजली की समस्या के कारण फोन चार्ज करना मुश्किल होता है।
Digital literacy भी बड़ी चुनौती है। कई बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग अभी ऐप्स का इस्तेमाल आसानी से नहीं कर पाते। Paid subscription भी बड़ी वजह है जिसके कारण Netflix और Amazon Prime जैसे प्लेटफॉर्म गांवों में सीमित हैं।
फ्री प्लेटफॉर्म ज्यादा लोकप्रिय हैं क्योंकि वहां बिना पैसे खर्च किए कंटेंट मिल जाता है। आने वाले समय में अगर सस्ते subscription प्लान आए तो paid platforms की पहुंच भी बढ़ सकती है।
आने वाले समय में और तेज होगा बदलाव
जानकारी के मुताबिक आने वाले वर्षों में बिहार के गांवों में डिजिटल मीडिया का इस्तेमाल और तेजी से बढ़ेगा। BharatNet जैसी योजनाओं से इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। इससे गांवों तक हाई स्पीड नेटवर्क पहुंचेगा।
अब कंपनियां गांवों और छोटे शहरों के दर्शकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बना रही हैं। भोजपुरी और मैथिली वेब सीरीज की संख्या बढ़ सकती है। इससे ग्रामीण दर्शकों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ा ज्यादा कंटेंट मिलेगा।
समस्तीपुर जैसे जिले दिखा रहे हैं कि गांव अब केवल दर्शक नहीं रहे। यहां लोग कंटेंट बना भी रहे हैं और डिजिटल दुनिया का हिस्सा भी बन रहे हैं। आने वाले समय में यह बदलाव बिहार की मीडिया दुनिया को पूरी तरह बदल सकता है।