Samastipur रेल मंडल में अब रेलवे की जमीन को पूरी तरह डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य साफ है भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को रोकना और हर इंच जमीन पर नजर रखना। Indian Railways के तहत चल रहे इस प्रोजेक्ट में ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे मंडल स्तर से लेकर रेलवे बोर्ड तक अधिकारी किसी भी जमीन की जानकारी तुरंत देख सकेंगे।

Samastipur Railway: डिजिटल मैपिंग से हर जमीन पर नजर, ऐसे हो रहा काम

रेलवे की अधिकृत एजेंसी इंजीनियरिंग विभाग के साथ मिलकर जमीन की डिजिटल मैपिंग कर रही है। टीम मौके पर जाकर जमीन की सीमाएं, उपयोग और स्थिति का पूरा डेटा इकट्ठा कर रही है।इस प्रक्रिया में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और तकनीकी डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे एक सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके।

खास बात यह है कि समस्तीपुर जंक्शन से जुड़े चार प्रमुख रेलखंडों—समस्तीपुर–मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर–रोसड़ा, समस्तीपुर–बरौनी और समस्तीपुर–दरभंगा—का सर्वे पूरा हो चुका है। इससे अब प्रशासन के पास जमीन की पूरी जानकारी उपलब्ध है, जिससे किसी भी अवैध कब्जे की पहचान आसान होगी।एवरग्रीन दृष्टि से देखें तो इस तरह की डिजिटल मैपिंग भविष्य में भूमि विवाद और अतिक्रमण जैसे मामलों को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

जमीन का पूरा डेटा तैयार, अतिक्रमण पर सख्ती तय

इस डिजिटल सिस्टम में यह साफ किया जा रहा है कि कौन सी जमीन खाली है, कौन सी व्यावसायिक उपयोग में है और कौन सी कृषि या अन्य कार्यों के लिए दी गई है।रेलवे स्टेशन, कॉलोनी, कारखाने और रेललाइन के आसपास की जमीन पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। फिलहाल बड़े स्टेशनों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि छोटे हाल्ट को बाद में जोड़ा जाएगा।इस कदम से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जमीन के बेहतर उपयोग की योजना भी बनाई जा सकेगी।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद अतिक्रमण पर तेजी से कार्रवाई करना आसान होगा। साथ ही, यह सिस्टम लंबे समय तक रेलवे संपत्ति की सुरक्षा में मदद करेगा।कुल मिलाकर, यह पहल रेलवे प्रशासन की एक मजबूत रणनीति का हिस्सा है, जो भविष्य में भूमि प्रबंधन को आधुनिक और प्रभावी बनाएगी।

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