Samastipur में वर्षों से बंद पड़े उद्योगों और संस्थानों को फिर से शुरू कराने की मांग को लेकर सोमवार को जिला विकास संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने दुधपुरा हवाई अड्डे के जीर्णोद्धार, समस्तीपुर चीनी मिल, ठाकुर पेपर मिल और मुक्तापुर स्थित रामेश्वर जूट मिल के नियमित संचालन की मांग उठाई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने रोजगार और औद्योगिक विकास के मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

Samastipur: जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों ने सरकार बस स्टैंड से जुलूस की शुरुआत की। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सभी लोग समाहरणालय पहुंचे। यहां करीब एक घंटे तक नारेबाजी की गई। प्रदर्शन के दौरान जिले में रोजगार के अवसर बढ़ाने और बंद पड़े उद्योगों को पुनर्जीवित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।

कलेक्ट्रेट गेट पर आयोजित सभा की अध्यक्षता शंकर प्रसाद साह ने की। वक्ताओं ने कहा कि जिले के कई बड़े उद्योग वर्षों से बंद हैं। इसका सीधा असर हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ा है। स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से उद्योगों को दोबारा शुरू करने के लिए ठोस और समयबद्ध पहल करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि उद्योग चालू होते हैं तो जिले की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय व्यापार और छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलेगा।

चीनी मिल, पेपर मिल और हवाई अड्डे को लेकर उठी मांग

सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के नेताओं ने अलग-अलग मुद्दे उठाए। शत्रुघ्न पंजी ने कहा कि करीब 23 एकड़ में फैली समस्तीपुर चीनी मिल वर्षों से बंद है। इसे फिर से चालू कर युवाओं को रोजगार दिया जाना चाहिए। राजद नेता राकेश ठाकुर ने ठाकुर पेपर मिल के पुनर्जीवन की मांग की। वहीं भाकपा-माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने दुधपुरा हवाई अड्डे के जीर्णोद्धार और संचालन शुरू करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे जिले के विकास को नई गति मिलेगी।

सभा समाप्त होने के बाद मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने अपर समाहर्ता को पांच सूत्री मांगपत्र सौंपा। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। आपको बता दें कि समस्तीपुर के कई पुराने उद्योग लंबे समय से बंद पड़े हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इनके दोबारा शुरू होने से जिले में रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को नई मजबूती मिल सकती है।

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