Samastipur Kavi Sammelan: समस्तीपुर के रेलवे केंद्रीय विद्यालय के निकट स्थित कुसुम सदन में रविवार को कुसुम पाण्डेय स्मृति साहित्य संस्थान की ओर से भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के साथ कई अन्य स्थानों से पहुंचे कवियों और साहित्यकारों ने भाग लिया। जानकारी के मुताबिक समारोह में हिंदी साहित्य की महान विभूतियों को श्रद्धांजलि दी गई और विविध विधाओं की रचनाओं का प्रभावशाली पाठ हुआ।

Samastipur Kavi Sammelan: साहित्यकारों को श्रद्धांजलि, याद किए गए महान रचनाकार

कार्यक्रम की शुरुआत गरिमामय माहौल में हुई। संस्था के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने जून माह में जन्मे हिंदी साहित्य के कई प्रमुख रचनाकारों के जीवन और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने देवकीनंदन खत्री, बाबा नागार्जुन, विष्णु प्रभाकर, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, कलक्टर सिंह केशरी, रामनाथ पांडेय, राजमणि राय मणि, श्याम नंदन प्रसाद, सांवलिया बिहारी लाल वर्मा, राजदेव झा।

डॉ. हरिवंश तरुण, रियासत हुसैन रिजवी, ललित कुमार सिंह नटवर और उमेशचंद्र कंठ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन साहित्यकारों की रचनाएं आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं। कार्यक्रम में मौजूद साहित्य प्रेमियों ने भी उनके योगदान को याद किया। पूरे परिसर में साहित्य और संस्कृति के प्रति सम्मान का वातावरण दिखाई दिया।

कविता, गजल और भजन से सजा यादगार साहित्यिक आयोजन

काव्य गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. राम सूरत प्रियदर्शी की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद डॉ. रामेश गौरीश ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व रेल राजभाषा अधिकारी भुवनेश्वर मिश्र ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मुकेश कुमार मौजूद रहे। मंच संचालन शायर प्रवीण कुमार चुन्नू ने सहज और प्रभावी ढंग से किया। गोष्ठी में भोजपुरी और बज्जिका की रचनाओं के साथ गजल, हास्य-व्यंग्य, भजन, रूमानी और पर्यावरण विषय पर आधारित कविताएं भी सुनाई गईं।

राज कुमार चौधरी, विष्णु कुमार केडिया, राम-लखन यादव, दीपक कुमार श्रीवास्तव, रामाश्रय राय राकेश, डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह त्यागी, अरुण कुमार सिंह मालपुरी, स्मृति झा, काविश जमाली, मो. जावेद, अरविंद सत्य दर्शी और कुमोद प्रसाद गिरि ‘बब्बन गिरि’ सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।

अंत में वरदान महादेव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। ऐसे साहित्यिक आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ समाज में भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं। यदि आपके आसपास भी ऐसे कार्यक्रम हों तो उनमें भाग लेकर स्थानीय साहित्यकारों का उत्साह बढ़ाया जा सकता है।

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