Patna Purnea Expressway: बिहार के बहुचर्चित पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि समस्तीपुर के सरायरंजन क्षेत्र में प्रभावशाली लोगों की जमीन बचाने के लिए एक्सप्रेसवे का रूट बदला गया। प्राधिकरण ने दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट किया है कि परियोजना का स्वीकृत रूट पहले से तय है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
Patna Purnea Expressway: सरायरंजन में रूट बदलने के आरोपों पर NHAI की सफाई
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सरायरंजन क्षेत्र के कुछ लोगों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री को पत्र भेजकर रूट परिवर्तन का आरोप लगाया। शिकायत में कहा गया था कि एक प्रभावशाली व्यक्ति की जमीन बचाने के लिए एक्सप्रेसवे के लगभग पांच किलोमीटर हिस्से का अलाइनमेंट बदल दिया गया।
आरोप लगाने वालों का कहना था कि इस बदलाव से बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित होंगे। साथ ही क्षेत्र के पुराने शैक्षणिक संस्थान केदार संत रामाश्रय कॉलेज को भी नुकसान पहुंच सकता है। इन दावों के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी।
अब NHAI ने आधिकारिक रूप से कहा है कि एक्सप्रेसवे का रूट 15 जनवरी 2025 को अलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी की बैठक में अंतिम रूप से स्वीकृत किया गया था। उस समय बिहार सरकार के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद थे। प्राधिकरण के अनुसार सरायरंजन के संबंधित हिस्से में उसी स्वीकृत मार्ग पर कार्य किया जा रहा है और किसी प्रकार का नया बदलाव नहीं हुआ है।
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कॉलेज सुरक्षित, कम होगा विस्थापन
प्राधिकरण ने कॉलेज से जुड़े दावों पर भी स्थिति स्पष्ट की है। NHAI के अनुसार केदार संत रामाश्रय कॉलेज की मुख्य इमारत पूरी तरह सुरक्षित है। केवल परिसर की एक छोटी और खाली जमीन भूमि अधिग्रहण की जद में आ रही है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान स्वीकृत मार्ग से सीमित संख्या में निर्माण प्रभावित होंगे। यदि वैकल्पिक रूट अपनाया जाता तो कहीं अधिक घर और दुकानें प्रभावित होतीं। इससे स्थानीय लोगों का विस्थापन भी कई गुना बढ़ जाता।
आपको बता दें कि यह परियोजना करीब 18 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही है। लगभग 245 किलोमीटर लंबा यह छह लेन एक्सप्रेसवे पटना को वैशाली, समस्तीपुर, मधेपुरा और पूर्णिया से जोड़ेगा। परियोजना पूरी होने के बाद यात्रा का समय कम होगा और उत्तर-पूर्व बिहार की कनेक्टिविटी को बड़ी मजबूती मिलेगी।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि आपकी जमीन या संपत्ति इस परियोजना से प्रभावित हो रही है, तो भूमि अधिग्रहण से जुड़ी आधिकारिक जानकारी केवल प्रशासन और NHAI के अधिकृत दस्तावेजों से ही प्राप्त करें। अफवाहों या अपुष्ट दावों पर भरोसा करने से बचें।
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