सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भोजपुर के भरत भूषण तिवारी (Bharat Tiwari) की कथित न्यायेतर हत्या की स्वतंत्र जांच कराने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने की छूट दी है। जानकारी के मुताबिक याचिका में सीबीआई जांच की मांग की गई थी। इसी सुनवाई के दौरान अदालत ने आसाराम की याचिका पर राजस्थान सरकार से भी जवाब तलब किया।

Bharat Tiwari: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का रास्ता दिखाया, जांच पर बहस तेज

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने स्पष्ट कहा कि इस मामले की सुनवाई शीर्ष अदालत में नहीं होगी। याचिकाकर्ता चाहे तो पटना हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। अधिवक्ता विशाल तिवारी ने जनहित याचिका दाखिल कर भरत भूषण तिवारी की मौत की सीबीआई या स्वतंत्र जांच समिति से जांच कराने की मांग की थी।

याचिका में कहा गया कि पुलिस किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में दंड देने वाली संस्था नहीं हो सकती। यह अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है। याचिका में हाल के वर्षों में कथित न्यायेतर हत्याओं की घटनाओं पर भी चिंता जताई गई। साथ ही 2014 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। बिहार सरकार पहले ही इस घटना की न्यायिक जांच की घोषणा कर चुकी है।

पुलिस और परिवार के दावे अलग, आसाराम मामले में भी सुनवाई

भरत भूषण तिवारी की मौत 17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुई थी। परिवार का दावा है कि उन्होंने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने गोली चला दी। दूसरी ओर बिहार पुलिस का कहना है कि तिवारी ने पहले पुलिस टीम पर फायरिंग की थी। जवाबी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई।

पुलिस ने उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ भी बताया, जबकि परिवार उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता कहता है। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की याचिका पर भी सुनवाई की। अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा। हालांकि सजा पर रोक लगाने या जमानत देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने जेल प्रशासन को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया। पीठ ने कहा कि गंभीर स्वास्थ्य स्थिति होने पर ही राहत पर विचार किया जाएगा।

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