सुपौल: बिहार के सुपौल जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। मरौना प्रखंड की गनौरा पंचायत में मुखिया और 14 वार्ड सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि पंचायत कर्मियों द्वारा विकास कार्यों के लिए लगातार रिश्वत मांगी जाती है, जिसके कारण गांव के विकास कार्य ठप पड़े हैं।
क्यों दिया गया इस्तीफा?
मुखिया जितेंद्र कुमार ने बताया कि पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और कनीय अभियंता जैसे कर्मी विकास योजनाओं को अंजाम तक पहुंचाने में सहयोग नहीं करते और रिश्वत की मांग करते हैं। उनके इस रवैये के कारण जनता में नाराजगी बढ़ रही है, जिससे मुखिया और वार्ड सदस्यों पर दबाव बढ़ गया।
इस्तीफा देने वाले प्रतिनिधि
मुखिया जितेंद्र कुमार के साथ जिन जनप्रतिनिधियों ने इस्तीफा दिया, उनमें उप मुखिया बेचनी देवी और वार्ड सदस्य माला देवी, पूनम देवी, शोभा देवी, रामप्रवेश महतो, पिंकी देवी, अभय कुमार यादव, मदन कुमार मंडल, सुरेंद्र सदा समेत 14 लोग शामिल हैं। उनका कहना है कि पंचायत कर्मियों के असहयोग के चलते उन्हें जनता की समस्याओं का समाधान करने में कठिनाई हो रही है।
BDO ने क्या कहा?
मरौना प्रखंड विकास पदाधिकारी रचना भारतीय ने बताया कि मुखिया का त्याग पत्र व्हाट्सएप के माध्यम से मिला है। उन्होंने भरोसा दिया कि इस मामले में जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जनप्रतिनिधियों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
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पंचायत में हड़कंप
सामूहिक इस्तीफे के कारण पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में हलचल मच गई है। अगर इस समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो पंचायत में प्रशासनिक कार्य ठप हो सकते हैं।
ग्रामीणों की चिंताएं
इस घटना से गनौरा पंचायत के ग्रामीणों के मन में सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर विकास कार्य पहले से ही रुके हुए थे, वहीं अब पंचायत प्रशासन के बिना हालात और बिगड़ सकते हैं।
क्या यह भ्रष्टाचार का मामला है?
मुखिया और वार्ड सदस्यों ने पंचायत कर्मियों पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। अगर यह सच साबित होता है तो यह न केवल पंचायत प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि ग्रामीणों के विश्वास को भी ठेस पहुंचेगी।
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