Bihar Fire Tragedy: मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हादसे में छह मरीजों की मौत के बाद पूर्णिया सांसद पप्पू यादव अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
Bihar Fire Tragedy: अस्पताल पहुंचकर पप्पू यादव ने उठाए बड़े सवाल
घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सांसद ने कहा कि इस तरह के हादसों के लिए केवल अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई स्तरों पर गंभीर खामियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन होता तो शायद इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती।
सांसद ने आरोप लगाया कि कई निजी अस्पतालों में नियमों की अनदेखी की जाती है और निगरानी तंत्र प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहा है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी मुलाकात की और अब तक की जांच प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हादसे की सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग और निशांत कुमार से की अपील
सांसद ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की नियमित जांच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक सख्ती की जरूरत है। उनका कहना था कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के बिना ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी पर बिना तथ्य के आरोप लगाना सही नहीं है। हालांकि उन्होंने हाथ जोड़कर अपील की कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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सांसद ने दावा किया कि हादसे के बाद की जा रही कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष हो और जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई निजी अस्पतालों में मरीजों के आर्थिक शोषण की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। आपको बता दें कि प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे हादसे यह याद दिलाते हैं कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं की नियमित जांच कितनी जरूरी है।
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