केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब आधिकारिक रूप से ‘Kerala’ की जगह ‘Keralam’ नाम किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस फैसले की घोषणा केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने की।इससे पहले 24 जून 2024 को राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र से नाम परिवर्तन की मांग की थी। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह मामला संसद की प्रक्रिया से गुजरेगा।
Keralam: प्रक्रिया क्या होगी और संविधान क्या कहता है?
नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया अनुच्छेद 3 के तहत पूरी की जाती है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद राष्ट्रपति संबंधित विधेयक को राज्य विधानसभा के पास भेजते हैं ताकि वह अपनी राय दे सके।राष्ट्रपति की सिफारिश के बाद ‘Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026’ संसद में पेश किया जाएगा। संसद की मंजूरी मिलते ही नया नाम आधिकारिक रूप से लागू होगा।
राज्य विधानसभा ने यह प्रस्ताव दूसरी बार पारित किया था। पहली बार भेजे गए प्रस्ताव में गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी संशोधन सुझाए थे। संशोधन के बाद प्रस्ताव दोबारा भेजा गया और अब उसे स्वीकृति मिल गई है।
नाम बदलने की मांग क्यों उठी?
राज्य के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने यह प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था। उनका तर्क था कि स्थानीय भाषा में राज्य को ‘Keralam’ कहा जाता है। इसलिए सभी आधिकारिक भाषाओं में भी यही नाम इस्तेमाल होना चाहिए।समर्थकों का कहना है कि यह कदम सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव से जुड़ा है।
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वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले लिया गया यह निर्णय राजनीतिक रूप से भी अहम हो सकता है।विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में पहले भी कई राज्यों और शहरों के नाम बदले गए हैं। नाम परिवर्तन की प्रक्रिया लंबी होती है, लेकिन संविधान इसके लिए स्पष्ट प्रावधान देता है
आगे क्या असर हो सकता है?
यदि संसद में विधेयक पारित हो जाता है, तो सरकारी दस्तावेजों, नक्शों और आधिकारिक अभिलेखों में नया नाम दर्ज होगा। हालांकि आम बोलचाल में बदलाव धीरे-धीरे ही नजर आएगा।यह फैसला केवल नाम परिवर्तन नहीं है। यह सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान से भी जुड़ा मुद्दा है। आने वाले महीनों में संसद की कार्यवाही इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी।कुल मिलाकर, केंद्र की मंजूरी के बाद नाम बदलने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। अब सभी की नजर संसद की मंजूरी पर है।
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