Bihar Vidhan Parishad चुनाव आयोग ने बिहार की नौ खाली होने वाली विधान परिषद् सीटों पर चुनाव की घोषणा कर दी। आयोग के अनुसार 18 जून को मतदान और मतगणना दोनों एक ही दिन कराई जाएगी। इस चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई बड़े नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों के नाम चर्चा में हैं। खास बात यह है कि कुछ सीटों पर नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। बिहार की राजनीति में यह चुनाव आने वाले विधानसभा समीकरणों के लिए भी काफी अहम माना जा रहा है।

Bihar Vidhan Parishad चुनाव कार्यक्रम जारी, जानिए कब क्या होगा

निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार एक जून को चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उम्मीदवार आठ जून तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नौ जून को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी जबकि 11 जून तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकते हैं। इसके बाद 18 जून को मतदान और मतगणना दोनों एक साथ कराई जाएंगी। इस बार चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 28 जून को नौ सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

फिलहाल इन सीटों में सबसे ज्यादा चार सीटें जनता दल यूनाइटेड के पास हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के पास दो-दो सीटें हैं। कांग्रेस के खाते में एक सीट है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के जरिए कई दल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेंगे। यही वजह है कि दलों के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर बैठकों का दौर तेज हो गया है।

बड़े नेताओं के बेटों की चर्चा ने बढ़ाई सियासी हलचल

इस चुनाव से पहले सबसे ज्यादा चर्चा कुछ चर्चित राजनीतिक परिवारों को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि कई नए चेहरों को विधान परिषद् भेजने की तैयारी चल रही है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ नेताओं के बेटे पहली बार सदन पहुंच सकते हैं। जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेटे निशांत कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से जुड़े दीपक प्रकाश के नाम लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। दोनों इस समय मंत्री हैं लेकिन किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इन्हें परिषद् के जरिए सदन में भेजा जा सकता है। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि पार्टी एक सीट पर अपना उम्मीदवार उतार सकती है। इससे मुकाबला और रोचक हो सकता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार विधान परिषद् चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं चुना जाता, लेकिन इसका असर राज्य की राजनीति पर काफी बड़ा होता है। यही कारण है कि छोटे दल भी इस चुनाव में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश करते हैं।

बिहार में विधान परिषद् चुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कई नए और पुराने चेहरे इस चुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।

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