Bihar की राजनीति में एक बड़ा अध्याय खत्म होता नजर आ रहा है। Nitish Kumar के इस्तीफे के बाद अब उनके पूरे राजनीतिक सफर पर चर्चा तेज हो गई है। नीतीश कुमार को राज्य की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने करीब दो दशक तक सत्ता संभाली और कई बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

Nitish Kumar: 7 दिन से शुरू हुआ सफर, 20 साल तक बना रहा प्रभाव

नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन उनका यह कार्यकाल सिर्फ 7 दिनों तक ही चला।इसके बाद 2005 में उन्होंने दोबारा सत्ता संभाली और यहीं से उनका असली राजनीतिक सफर शुरू हुआ। 2005 से 2010 और फिर 2010 से 2014 तक उन्होंने लगातार मजबूत सरकार चलाई। इसके बाद भी अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के बीच वे कई बार मुख्यमंत्री बने और कुल मिलाकर 10 बार इस पद की शपथ लेकर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया।

‘बदले बिहार’ की कहानी और विकास की छाप

Nitish Kumar के शासनकाल को अक्सर “बदलते बिहार” के दौर के रूप में याद किया जाता है। एक समय था जब बिहार को अपराध और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, लेकिन 2005 के बाद धीरे-धीरे तस्वीर बदलने लगी। सड़क, शिक्षा और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में सुधार को उनकी बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

उन्होंने जनता के बीच जाकर कई यात्राएं कीं, जिससे उनकी पकड़ मजबूत बनी रही। एवरग्रीन नजरिए से देखें तो किसी भी नेता की पहचान सिर्फ सत्ता में रहने से नहीं, बल्कि बदलाव लाने से बनती है, और नीतीश कुमार इसी वजह से खास रहे।

उतार-चढ़ाव और बदलते राजनीतिक समीकरण

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर हमेशा सीधा नहीं रहा। उन्होंने समय-समय पर अलग-अलग दलों के साथ गठबंधन किया और परिस्थितियों के अनुसार फैसले लिए।कई बार आलोचना भी हुई, लेकिन हर बार उन्होंने खुद को नए तरीके से स्थापित किया।

अब उनके इस्तीफे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे राजनीति में सक्रिय रहेंगे या यह उनका अंतिम पड़ाव है। नीतीश कुमार का सफर 7 दिन से शुरू होकर 20 साल तक पहुंचा, जो बिहार की राजनीति में एक मिसाल बन गया।

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