30 अप्रैल 2026 की रात और 1 मई की सुबह आई भीषण आंधी-बारिश ने Bihar में भारी तबाही मचा दी। अलग-अलग जिलों से सामने आई जानकारी के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। तेज हवाओं, ओलावृष्टि और वज्रपात ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
मुजफ्फरपुर, मधुबनी, समस्तीपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी और चंपारण समेत कई जिलों में पेड़, बिजली के पोल और तार गिरने से रातभर बिजली आपूर्ति बाधित रही। सड़कों पर पेड़ गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ और कई जगहों पर रेल सेवाएं भी बाधित रहीं।
Bihar: अलग-अलग हादसों में गई जान, कई जिलों में नुकसान
इस प्राकृतिक आपदा का असर राज्य के कई हिस्सों में अलग-अलग रूप में देखने को मिला। कहीं पेड़ गिरने से लोगों की मौत हुई, तो कहीं वज्रपात ने जान ले ली।बेगूसराय में दीवार गिरने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि हाजीपुर में एक बच्चे की जान चली गई। मधुबनी और समस्तीपुर में भी पेड़ गिरने और बिजली गिरने से कई लोगों की मौत की खबर सामने आई है। दरभंगा और मुजफ्फरपुर में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आईं, जहां लोग घरों के अंदर ही हादसे का शिकार हो गए।
इसके अलावा कई जगहों पर ओलावृष्टि के कारण घरों और कच्ची संरचनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और ज्यादा गंभीर रही, जहां राहत और बचाव कार्यों में भी दिक्कत आई।
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फसलों को भारी नुकसान, किसानों की बढ़ी चिंता
इस आपदा का असर सिर्फ जनजीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। आम और लीची की फसलें, जो इस समय तैयार हो रही थीं, ओलावृष्टि और तेज हवाओं की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।कई किसानों का कहना है कि उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई है। हालांकि कुछ जगहों पर बारिश से सब्जियों और गन्ने जैसी फसलों को थोड़ा फायदा भी हुआ है, लेकिन कुल मिलाकर नुकसान ज्यादा हुआ है।
प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने और नुकसान का आकलन करने की बात कही है। साथ ही प्रभावित परिवारों को सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है।एवरग्रीन दृष्टिकोण से देखें तो इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं हर साल अलग-अलग रूप में सामने आती हैं। ऐसे में मौसम पूर्वानुमान, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा प्रबंधन सिस्टम को और मजबूत करना जरूरी हो जाता है। फिलहाल राज्य में हालात सामान्य करने के प्रयास जारी हैं और लोग राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
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