Darbhanga News: कोसी नदी की बाढ़ से प्रभावित दरभंगा जिले में बाढ़ पीड़ितों पर विपत्ति थमने का नाम नहीं ले रही। बड़गांव थाना क्षेत्र के चतरा स्थित कमला बलान नदी के पूर्वी बांध पर शरण लिए इन पीड़ितों को गुरुवार रात एक और भारी त्रासदी का सामना करना पड़ा। बाढ़ से बेघर हुए इन लोगों ने घास-फूस के अस्थायी रैन बसेरे बनाकर किसी तरह शरण ले रखी थी, लेकिन अचानक लगी इस भीषण आग ने उन्हें एक बार फिर से असहाय बना दिया।

कोसी नदी की बाढ़ से उजड़े घरों में लगी आग, सबकुछ जलकर हुआ खाक

कोसी नदी के बाढ़ के कारण पश्चिमी तटबंध टूटने के बाद, दरभंगा जिले के कई गांवों के सैकड़ों परिवारों ने मजबूरी में अपने घर छोड़कर इस बांध पर अस्थायी बसेरे बनाए थे। 29 सितंबर की इस घटना के बाद वे घास-फूस के घरों में रहने लगे थे। हालांकि, गुरुवार की रात महेंद्र मुखिया के घर में लगी इस आग ने बाढ़ पीड़ितों की बची-खुची संपत्ति को भी राख कर दिया। आग ने धरवेंद्र मुखिया, जितेंद्र मुखिया और सतवीर मुखिया के घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया, और परिवारों के पास न तो सिर छुपाने की छत बची और न ही जीवनयापन के साधन।

अग्निशमन दल ने आग पर पाया काबू, पीड़ितों को फिर मिला संकट

बाढ़ पीड़ितों की इस नई त्रासदी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने अग्निशमन दल को तुरंत मौके पर भेजा। दमकल कर्मियों की मदद से आग को काबू में लाया गया, लेकिन तब तक महेंद्र मुखिया की एक गाय, जितेंद्र और सतवीर मुखिया की बकरियां झुलसकर मर चुकी थीं। बाढ़ और अग्निकांड के इस दोहरे संकट ने पीड़ितों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। आग लगने की वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, परंतु प्रशासन द्वारा जांच जारी है।

कोसी नदी की बाढ़ से दर-दर की ठोकर खा रहे पीड़ित

बाढ़ से पीड़ित इन परिवारों ने अपनी जान बचाने के लिए कोसी नदी के इस तटबंध पर शरण ली थी। लेकिन अब यह भी सुरक्षित नहीं रहा, और आग लगने के कारण बाढ़ पीड़ितों की स्थिति और भी दयनीय हो गई है। घटना के बाद दरभंगा जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों ने मौके पर जाकर नुकसान का आकलन किया और बाढ़ पीड़ितों की मदद का आश्वासन दिया।

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