बिहार के समस्तीपुर जिले में छठ पर्व की तैयारियों के साथ मिट्टी के चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है। यह महापर्व आधुनिकता के बावजूद परंपरागत रीति-रिवाजों और आस्था से मनाया जाता है, जिसके कारण छठ का प्रसाद विशेष रूप से मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है। समस्तीपुर और आसपास के इलाकों में लोग सामान्य दिनों में गैस चूल्हे का उपयोग करते हैं, लेकिन छठ जैसे महत्त्वपूर्ण त्योहार पर मिट्टी के चूल्हे की विशेष मांग रहती है।
छठ के दौरान समस्तीपुर में बढ़ी मिट्टी के चूल्हे की मांग | Demand For Earthen Stove Increases During Chhath
समस्तीपुर के बहादुरपुर बूढ़ी गंडक बांध के पास कई परिवार दशहरे के बाद मिट्टी के चूल्हों का निर्माण करते हैं और छठ पर्व के दौरान इन्हें बेचते हैं। महंगाई के कारण इन चूल्हों की कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में 30-40 रुपये की वृद्धि हुई है। पिछले साल जो चूल्हे 50-60 रुपये में बिकते थे, इस वर्ष उनकी कीमत 80-100 रुपये तक पहुंच गई है। Samastipur News के अनुसार, इस बढ़ती मांग के मद्देनज़र लोग दशहरे के बाद से ही निर्माण कार्य में जुट जाते हैं।
संबंधित आर्टिकल्स
Bihar Chunav 2025: लालू-राबड़ी के साथ तेजस्वी यादव ने भरा पर्चा, RJD में दिखी बड़ी एकजुटता!
Bihar Election 2025: NDA में सब कुछ ठीक! अमित शाह से मुलाकात के बाद कुशवाहा का बदला सुर, प्रशांत किशोर ने किया बड़ा ऐलान
BJP Candidates First List: बिहार चुनाव 2025 में बीजेपी की पहली लिस्ट जारी, 9 विधायकों के टिकट कटे
Bihar Election 2025: मांझी के बेटे ने चुनाव न लड़ने का किया ऐलान
Bihar Election 2025: NDA उम्मीदवारों की सूची कल जारी, अमित शाह शुरू करेंगे प्रचार अभियान
Tej Pratap Candidates First List: महुआ से लड़ेंगे तेज प्रताप, 21 सीटों पर उतारे प्रत्याशी
छठ पर्व में मिट्टी के चूल्हे का महत्व | Chhath Festival Brings Demand For Earthen Stoves in Bihar
पुरानी दुर्गा स्थान की रेखा देवी पिछले तीन वर्षों से छठ के लिए विशेष रूप से मिट्टी के चूल्हे बना रही हैं। वह बताती हैं कि छठ के दौरान खरना का प्रसाद और अर्घ्य के ठेकुआ जैसे पकवान इसी चूल्हे पर तैयार किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मिट्टी को शुद्ध माना जाता है, जिससे छठ पर्व के समय इसका महत्व और बढ़ जाता है। बिहार के समस्तीपुर में छठ के दौरान मिट्टी के चूल्हों की मांग का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी देखा जा सकता है, जिससे इस व्यापार में जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ जाती है।
शहरी क्षेत्रों में बढ़ी छठ के लिए मिट्टी के चूल्हों की मांग | Samastipur News Highlights Demand For Earthen Stoves
रेखा देवी कहती हैं कि विजयादशमी के बाद से ही वह चूल्हे का निर्माण शुरू कर देती हैं। इस निर्माण में मिट्टी लाने से लेकर घास मिलाने, उसका ढांचा तैयार करने और उसे सुखाने तक की प्रक्रिया में 10-15 दिन का समय लगता है। Samastipur News के अनुसार, दीपावली के बाद से खरना तक चूल्हों की बिक्री तेजी से होती है, जिसमें मुख्य ग्राहक शहरी इलाकों के लोग होते हैं, जो आम दिनों में गैस चूल्हे का उपयोग करते हैं, लेकिन छठ पर्व पर मिट्टी के चूल्हे का उपयोग करते हैं।
इसे भी पढ़े :-
- दिवाली और छठ पर मुजफ्फरपुर पुलिस की कड़ी चौकसी: जानें कैसे रखेंगे संदिग्धों पर नजर
- बिहार: ज़मीन विवाद में पार्षद के बेटे की गोली मारकर हत्या, 20 साल से चल रहा था संघर्ष
- दर्दनाक सड़क हादसा: मुजफ्फरपुर में 2 युवकों की जान गई, जानें पूरी कहानी
- मुजफ्फरपुर में Avadh Assam Express में हड़कंप! क्या है ट्रेन में विस्फोट की सच्चाई?
- Bihar News: बक्सर में बनेगा एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जाम से मिलेगी राहत