दरभंगा: बिहार शिक्षक ट्रांसफर की नई नीति के तहत साक्षमता परीक्षा पास शिक्षकों की ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर नगर पंचायत प्रारंभिक शिक्षक संघ ने सरकार की नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ का आरोप है कि यह बिहार शिक्षक ट्रांसफर की नई नीति शिक्षकों के साथ धोखाधड़ी का एक नया तरीका है और इसके विरोध में वे बड़े आंदोलन की योजना बना रहे हैं। दरभंगा जिला अध्यक्ष रफीउद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि सरकार ने पहले कहा था कि दिव्यांग शिक्षकों, महिलाओं और अन्य विशेष श्रेणी के शिक्षकों को उनके गृह पंचायत में रखा जाएगा, लेकिन अब यह वादा पूरा नहीं हो रहा है।

सिद्दीकी ने यह भी बताया कि पुरुष शिक्षकों को अनुमंडल से बाहर ट्रांसफर किया जा रहा है, जिससे उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

बिहार शिक्षक ट्रांसफर नीति पर संघ की प्रमुख मांगें

सिद्दीकी ने बताया कि 1971 से पहले बिहार में शिक्षकों का चयन ग्रामीण समुदाय द्वारा किया जाता था और उन्हें मानदेय दिया जाता था। जब जगन्नाथ मिश्रा मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने शिक्षकों को सरकार के अधिग्रहण में लाने और ऐच्छिक ट्रांसफर पोस्टिंग की व्यवस्था शुरू की। अब सरकार शिक्षकों को अपनी मर्जी से ट्रांसफर कर रही है, जो कि उचित नहीं है। नगर पंचायत प्रारंभिक शिक्षक संघ ने सरकार से यह मांग की है कि शिक्षकों को आयक्षिक ट्रांसफर दिया जाए और उन्हें अनुमंडल से बाहर ट्रांसफर न किया जाए।

संघ ने यह भी कहा कि 2015 में नियोजित शिक्षकों को 5200 का वेतनमान दिया गया था, जिससे वे राज्य कर्मियों की श्रेणी में आ गए। अब उनसे एनपीएस की मांग की जा रही है, जो कि अस्वीकार्य है।