भारत और मलेशिया के रिश्तों को एक नई दिशा देते हुए प्रधानमंत्री PM Modi के दो दिवसीय मलेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए। राजधानी कुआलालंपुर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारत और मलेशिया ने व्यापार, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, शिक्षा, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। मलेशियाई प्रधानमंत्री Anwar Ibrahim ने भारत को भरोसेमंद साझेदार बताते हुए कहा कि यह साझेदारी केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा मूल्यों और भविष्य की जरूरतों पर आधारित है।
PM Modi: भारत–मलेशिया रणनीतिक साझेदारी को मिला नया आयाम
बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने इसे “रणनीतिक और भविष्य उन्मुख” करार दिया। मलेशिया ने भारत के साथ 1957 से चले आ रहे संबंधों को याद करते हुए कहा कि 2024 में इन्हें व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था, जिसे अब और मजबूत किया जा रहा है। बातचीत के दौरान दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को बढ़ाने, डिजिटल इकॉनमी और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और कनेक्टिविटी को प्रोत्साहन देने जैसे विषयों पर सहमति बनाई।
प्रधानमंत्री Anwar Ibrahim ने बताया कि द्विपक्षीय व्यापार 8.59 अरब डॉलर से आगे बढ़ने की क्षमता रखता है। भारतीय रुपये और मलेशियाई रिंगित में लेनदेन को उन्होंने एक “महत्वपूर्ण उपलब्धि” बताया, जिससे वैश्विक अस्थिरता के बीच दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिल सकती है। यह साझेदारी भारत की विदेश नीति, रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग को नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही है।
शिक्षा, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क पर खास जोर
बैठक में शिक्षा और मानव संसाधन विकास को भी अहम स्थान मिला। मलेशियाई प्रधानमंत्री Anwar Ibrahim ने कहा कि भारत के शैक्षणिक संस्थानों ने पिछले एक दशक में वैश्विक पहचान बनाई है और मलेशिया में भारतीय छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने दोनों देशों के बीच छात्र विनिमय और संयुक्त रिसर्च को बढ़ावा देने की बात कही।
इसके साथ ही रक्षा और सुरक्षा सहयोग, कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन को लेकर भी ठोस चर्चा हुई। दोनों देशों ने कुल 11 दस्तावेजों और एमओयू का आदान-प्रदान किया, जिनमें सेमीकंडक्टर, हेल्थकेयर और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। भारत द्वारा मलेशिया में नया कांसुलेट खोलने के फैसले को भी तुरंत मंजूरी दी गई, जिसे लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत–मलेशिया संबंध को केवल क्षेत्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी नई मजबूती देगा। यूक्रेन-रूस और मध्य पूर्व जैसे मुद्दों पर शांति प्रयासों के समर्थन को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच सहमति दिखी, जिससे यह साझेदारी दीर्घकालिक और भरोसे पर आधारित नजर आती है।
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