Cash vs Online Rent Payment: किराये के घरों में रहने वाले लाखों लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है: किराया कैश में देना बेहतर है या ऑनलाइन? दोनों ही तरीके पूरी तरह से कानूनी हैं, लेकिन अगर भविष्य में किराये को लेकर कोई विवाद होता है, तो पेमेंट का तरीका बहुत मायने रखता है। जानकारों का मानना है कि आजकल ऑनलाइन पेमेंट को ज़्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है।
किराया ऑनलाइन देना बेहतर क्यों माना जाता है?
जानकारों के मुताबिक, UPI, बैंक ट्रांसफर या नेट बैंकिंग से किराया देने का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि हर ट्रांज़ैक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड अपने आप बन जाता है। बैंक स्टेटमेंट में साफ़ दिखता है कि पैसे कब भेजे गए, कितनी रकम थी और पाने वाले का अकाउंट डिटेल क्या था। अगर मकान मालिक बाद में यह दावा करे कि किराया नहीं मिला, तो यह रिकॉर्ड एक अहम सबूत का काम कर सकता है।
भारत के लिए आई बड़ी खुशखबरी, 7.26 अरब डॉलर बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार, RBI के ताजा आंकड़ों ने चौंकाया
क्या किराया कैश में देना गलत है?
भारत में किराया कैश में देना गैर-कानूनी नहीं है। आज भी बहुत से लोग अपना किराया कैश में ही देते हैं। हालाँकि, अगर आप कैश में पेमेंट करते हैं, तो हर बार लिखित रसीद लेना बहुत ज़रूरी है। रसीद में तारीख, किराये की रकम, किस महीने का किराया दिया जा रहा है और मकान मालिक के हस्ताक्षर होने चाहिए। यह दस्तावेज़ भविष्य में आपके अधिकारों की रक्षा कर सकता है।















