EPFO जल्द ही अपने CPSE और भारत 22 ETFs (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में किए गए निवेश को रिडीम करने के लिए केंद्रीय न्यासी बोर्ड की मंजूरी लेने वाला है, जिससे उसे ₹ 17,237 करोड़ का महत्वपूर्ण लाभ होने की उम्मीद है। इसके अलावा, बोर्ड की आगामी बैठक में गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एक नई पहल, EPFO 3.0 सिस्टम पर भी विचार किया जाएगा। यह बोर्ड रविवार को 18 प्रमुख एजेंडा मंदो पर गहन चर्चा करेगा, जिनमें ये दो अहम प्रस्ताव शामिल हैं।
EPFO के निवेश पर अपडेट
इस वित्त वर्ष 2025-26 में एम्पलाइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन, CPSE और 22 ईटीएफ (Exchange–Traded Fund) में इन्वेस्टमेंट को भुनाने (रिडीम) करने की तैयारी में है। अभी बोर्ड से मंजूरी नहीं आई है मगर जैसे ही प्रस्ताव पास होगा तो EPFO को लगभग ₹17,237 करोड़ का मुनाफा होगा। यह रकम मिलने के बाद ब्याज अकाउंट में जोड़ा जाएगा और इससे PF मेमेबर्स को अच्छा खासा एनुअल रिटर्न आ सकता है और इससे उन्हें बहुत फायदा होगा। फिलहाल EPFO बाकी ETF स्कीम में निवेश बनाए रखेगा और दूसरी ओर उनकी अवधि 4 साल से 5 साल करने की योजना पर काम कर रहा है।
EPFO 3.0: गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए लाभदायक
एम्पलाइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन एक नया प्रोजेक्ट लेकर आ रहा है जिसका नाम है EPFO 3.0, इसका मकसद है अपने कंप्यूटर सिस्टम और टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क को एक नया मोड़ देना। इससे गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को बहुत लाभ होगा, जिससे उन्हें सिक्योरिटी बेनिफिट्स देने में मदद मिलेगी। वक्त के साथ जैसे–जैसे EPFO के मेंबर्स बढ़ेंगे वैसे ही इस सिस्टम में और बदलवा देखने को मिलेगे और यह तेजी से काम करेगा जिससे यह काम को और आसानी से संभाल लेगा। EPFO से जुड़ने के दो तरीके है, एक एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंटेंसिव स्कीम (ELIS) और दूसरा 2020 के सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत, जब वह लागू होगा।
EPFO केंद्रीय बोर्ड की अहम बैठक: मनसुख मांडवीय करेंगे अध्यक्षता
EPFO का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय, केंद्रीय बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT), रविवार को केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक करेगा, जिसमें 18 जरूरी मुद्दों पर चर्चा होगी। यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि वित्त मंत्रालय के निर्देशानुसार EPFO अपने नए फंड का 5% से 15% हिस्सा शेयर बाजार में निवेश करता है, और वर्तमान में यह 15% तक हिस्सा श्रेणी iv (c) और iv (d) के विशिष्ट ETFs (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में लगाया जा रहा है।















