बिहार की राजधानी पटना के संपतचक बाजार में इस बार नवरात्रि के मौके पर राज्य का सबसे ऊंचा पंडाल बनाया गया है। इसकी ऊंचाई 151 फीट और चौड़ाई 80 फीट है। इसे झारखंड के जामताड़ा से आए 15 कारीगरों ने डेढ़ महीने में तैयार किया है। इस भव्य पंडाल की खूबसूरती और अनोखी डिज़ाइन लोगों को काफी आकर्षित कर रही है।
सिद्धपीठ बड़की दुर्गा मंदिर की तर्ज पर तैयार
इस पंडाल का डिज़ाइन बेगूसराय के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बड़की दुर्गा मंदिर के तर्ज पर किया गया है। यह मंदिर एशिया का सबसे ऊंचा माता का मंदिर माना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पटना के इस पंडाल को देखने के लिए न केवल शहर बल्कि आसपास के जिलों से भी लोग आ रहे हैं।
पंडाल बनाने वाले कारीगरों का समर्पण
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पंडाल तैयार करने वाले कारीगर मुस्लिम समुदाय से हैं और वे निर्माण के दौरान पूरी तरह सात्विक जीवन शैली का पालन करते हैं। इस दौरान वे अंडा, मांस और मछली का सेवन नहीं करते। कारीगरों ने बताया कि वे पिछले 10 साल से पंडाल बना रहे हैं और हर बार सात्विकता का खास ख्याल रखते हैं।
1971 से जारी है परंपरा
संपतचक में यह नवरात्रि पूजा 1971 से हो रही है। पहले यहां केवल एक छोटा गांव था, लेकिन अब यह आयोजन एक बड़ा उत्सव बन चुका है। 40 से 50 गांवों के लोग इस आयोजन में शामिल होते हैं और मां दुर्गा की प्रतिमा की पूजा करते हैं।
35 लाख की लागत से बना पंडाल
इस विशाल पंडाल को बनाने में लगभग 30 से 35 लाख रुपए खर्च हुए हैं। पंडाल की ऊंचाई इसे बिहार का सबसे ऊंचा पंडाल बनाती है। पिछले साल यहां अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया था, लेकिन इस साल इसकी भव्यता पहले से भी ज्यादा है।
पटना का यह पंडाल नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विविधता का एक प्रतीक बन गया है, जिसे देखने हर कोई उत्सुक है।
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