बेतिया में सड़क हादसे में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान चनपटिया थाना क्षेत्र के गिद्धा गांव निवासी रामदेव पासवान के 28 वर्षीय बेटे अर्जुन पासवान के रूप में हुई है। घटना 29 नवंबर को चनपटिया थाना क्षेत्र के बेतिया-मैनाटांड़ मुख्य पथ स्थित लौहियरिया चौक पर हुई थी।
21 दिन तक लड़ी जिंदगी की जंग
घटना के दिन शाम 5 बजे अर्जुन पासवान की बाइक की आमने-सामने टक्कर हो गई थी। गंभीर रूप से घायल अर्जुन को आनन-फानन में इलाज के लिए जीएमसीएच बेतिया ले जाया गया। वहां से रात में उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए गोरखपुर रेफर कर दिया गया। गोरखपुर के रविदास हॉस्पिटल और अन्य निजी अस्पताल में इलाज के बाद भी अर्जुन की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। 21 दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद अर्जुन ने दम तोड़ दिया।
सीटेट की तैयारी कर रहा था अर्जुन
अर्जुन पासवान हरियाणा के पानीपत से बीएड की पढ़ाई पूरी कर चुका था। उसकी सीटेट की परीक्षा 14 जनवरी को होनी थी। एक उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों के साथ अर्जुन अपने परिवार के लिए बेहतर जिंदगी की कोशिश में था।
परिजनों में कोहराम, परिवार को भारी नुकसान
अर्जुन की मौत के बाद उनके घर में कोहराम मच गया है। उनकी पत्नी सोनी देवी और तीन बच्चे- प्रिंस कुमार (12), पवन कुमार (10), और प्रिया कुमारी (9) हादसे के बाद बेसुध हैं। पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की सूचना पर अस्पताल नाका थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जीएमसीएच बेतिया भेज दिया। पुलिस के मुताबिक, मामले में फर्द बयान दर्ज कर कार्रवाई के लिए संबंधित थाना को भेजा जाएगा। थानाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है।
संक्षेप में
यह घटना बिहार में सड़क सुरक्षा की कमजोरियों और तेज रफ्तार के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की गंभीरता को दर्शाती है। अर्जुन पासवान का असमय निधन एक दर्दनाक उदाहरण है कि कैसे एक हादसा पूरे परिवार की जिंदगी को बदल देता है।
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