बिहार में जनसंख्या वृद्धि एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। देशभर में यह वृद्धि दर दिल्ली के बाद दूसरे नंबर पर है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में बताया कि बिहार की अनुमानित जनसंख्या वृद्धि दर 14.4% है, जबकि दिल्ली में यह 18.3% है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि उत्तर भारत में दक्षिण की तुलना में जनसंख्या बढ़ने की गति तेज़ है।
कहां है समस्या?
बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। फिर भी ये प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं। सरकार ने गर्भनिरोधक सेवाओं से लेकर नसबंदी के लिए क्षतिपूर्ति योजनाएं और प्रसव के बाद महिलाओं को गर्भनिरोधक साधन उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। यहां तक कि आशा कार्यकर्ताओं को गर्भनिरोधक साधन घर-घर पहुंचाने का जिम्मा दिया गया है।
लेकिन असली समस्या जागरूकता की कमी और सामाजिक बाधाओं की है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में लोग परिवार नियोजन को लेकर उतने गंभीर नहीं हैं।
क्यों है यह चिंताजनक?
बढ़ती जनसंख्या का असर हर स्तर पर पड़ता है:






















