किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में एक 17 वर्षीय लड़की की शादी हो रही थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन की टीम ने बारात के पहुंचने से पहले ही इसे रोक दिया। चुरली पंचायत के वार्ड संख्या 3 में शादी की सारी तैयारियां हो चुकी थीं, और रिश्तेदार भी पहुंच चुके थे। शादी की रस्में भी शुरू होने वाली थीं, लेकिन प्रशासन ने इसे रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
प्रशासन ने किया परिवार को समझाना
बाल विवाह को लेकर मिली जानकारी के बाद किशनगंज के जन निर्माण केंद्र की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया और अनुमंडल पदाधिकारी को सूचित किया। इसके बाद, प्रशासन ने एक टीम गठित की और पुलिस, प्रखंड विकास पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मदद से लड़की के माता-पिता को बाल विवाह के खतरों और इसके कानूनी दुष्प्रभाव के बारे में समझाया। इसके बाद परिवार ने यह निर्णय लिया कि वे अपनी बेटी की शादी 18 वर्ष की उम्र के बाद ही करेंगे।
शादी की पूरी तैयारी के बावजूद रोक
शादी के लिए घर में पंडाल लगाया गया था, खानपान तैयार था, और रिश्तेदार भी आ चुके थे। लेकिन, प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद इस शादी को रुकवाया। लड़की के माता-पिता से एक शपथ पत्र भी लिया गया, जिसमें यह वादा किया गया कि वे अपनी बेटी की शादी तब तक नहीं करेंगे जब तक वह 18 वर्ष की नहीं हो जाती।
इस घटना से यह साफ हो गया कि बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन बाल विवाह को लेकर बेहद गंभीर हैं और ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं।
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