पटना: बिहार की राजधानी पटना में डाकबंगला चौराहा पर स्थित 100 साल पुरानी युसूफ बिल्डिंग को उच्च न्यायालय ने तोड़ने का आदेश दिया है। पटना हाई कोर्ट ने बिल्डिंग में स्थित दुकानों को एक हफ्ते के अंदर खाली करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में दुकानों को खाली नहीं किया गया, तो नगर निगम को पूरी छूट होगी कि वह दुकानों को खाली करवा सके।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति नानी तागीया की खंडपीठ ने प्रकाश स्टूडियो और अन्य दुकानदारों की याचिका को खारिज करते हुए एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा।
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यह मामला तब शुरू हुआ जब अफजल नामक एक प्रतिवादी ने पटना नगर निगम के आयुक्त को पत्र लिखकर युसूफ बिल्डिंग की जांच करने और उसे तोड़ने की अनुमति मांगी थी। पत्र में यह कहा गया था कि यह बिल्डिंग 100 साल पुरानी है और इसके भूतल को छोड़कर बाकी पूरा हिस्सा पिछले चार वर्षों से खाली पड़ा है। इस पर नगर निगम के आयुक्त अनिमेष पाराशर ने कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
दुकानदारों में मायूसी
इस फैसले के बाद दुकानदारों में निराशा का माहौल है। दुकानदार रमेश ने कहा, "हम लोग अब नगर निगम के इंतजार में हैं कि कब वे आकर हमारी दुकानें तोड़ेंगे। हमने कोर्ट में भी यह कहा था कि इस बिल्डिंग को तोड़ने की बजाय इसका मरम्मत किया जा सकता था। यदि 100 साल पुरानी बिल्डिंग को तोड़ दिया जाएगा, तो फिर बाकी सभी पुरानी बिल्डिंगों को भी तोड़ देना चाहिए। इतना किराया हमसे लिया गया, लेकिन कभी इसकी मरम्मत नहीं कराई गई।"
दुकानदारों ने यह भी कहा कि अब उन्हें यहां से बेदखल कर दिया गया है। "हमारी दुकानें साल 1950 से यहां हैं, लेकिन अब हमारा सब कुछ खत्म हो गया है। हम चाहते हैं कि अगर संभव हो तो हमें दूसरी जगह दी जाए, ताकि हम अपनी आजीविका चला सकें," दुकानदारों ने कहा।
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