अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। BRICS, Vladimir Putin को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की संभावना जताई गई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संकेत दिया है कि पुतिन इस साल भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं।

BRICS समिट 2026: क्या बोले क्रेमलिन?

क्रेमलिन की ओर से कहा गया है कि पुतिन की भागीदारी लगभग तय मानी जा रही है, हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह शारीरिक रूप से शामिल होंगे या वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे।BRICS दुनिया के प्रमुख उभरते देशों का समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।इस बार भारत 18वें BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ऐसे में पुतिन की मौजूदगी इस आयोजन को और अहम बना सकती है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समिट

भारत के लिए यह समिट काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे देश को वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका मिलेगा।इस सम्मेलन में ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों के मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं।अगर व्लादिमीर पुतिन इसमें शामिल होते हैं, तो भारत-रूस संबंधों को और मजबूती मिल सकती है।

पुतिन की भागीदारी का क्या होगा असर?

पुतिन की संभावित भागीदारी से इस समिट का वैश्विक महत्व और बढ़ जाएगा। यह दिखाता है कि BRICS समूह अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत मंच बनता जा रहा है।इसके साथ ही, यह भी संकेत मिलता है कि दुनिया धीरे-धीरे बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां कई देश मिलकर वैश्विक फैसले लेते हैं।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि पुतिन किस फॉर्मेट में इस समिट में हिस्सा लेंगे।आने वाले समय में इससे जुड़े और अपडेट सामने आ सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि यह समिट वैश्विक राजनीति के लिए एक बड़ा मंच साबित होने वाला है।

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