Vijay Government PIL Supreme Court: बताते चले की 21 मई 2026 को तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा मोड़ देखने को मिला। अभिनेता से नेता बने सीएम विजय की सरकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में सरकार गठन के दौरान कथित विधायकों की खरीद-फरोख्त की जांच और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर राज्य की राजनीति को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। विपक्षी दल लगातार सरकार के बहुमत और समर्थन जुटाने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।
Tamil Nadu Politics में क्यों बढ़ा विवाद
तमिलनाडु में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले। TVK पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इसके बाद कांग्रेस और कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई गई। इसी घटनाक्रम को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। मदुरई के के.के. रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि फ्लोर टेस्ट से पहले कई विधायकों पर दबाव बनाया गया और राजनीतिक सौदेबाजी हुई।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि विश्वास मत के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं हुआ। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले भारतीय राजनीति में पहले भी सामने आते रहे हैं। कई राज्यों में सरकार बचाने और बनाने के लिए समर्थन जुटाने पर सवाल उठ चुके हैं। ऐसे मामलों में अदालतें संवैधानिक प्रक्रिया और विधानसभा के अधिकारों को ध्यान में रखकर फैसला देती हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विवाद केवल सरकार तक सीमित नहीं है बल्कि इससे राज्य की प्रशासनिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।
Supreme Court PIL और CBI जांच की मांग पर क्या है पूरा मामला
याचिका में केंद्र सरकार, CBI और तमिलनाडु सरकार को पक्षकार बनाया गया है। आरोप लगाया गया है कि विश्वास प्रस्ताव के दौरान बहुमत साबित करने के लिए गलत तरीके अपनाए गए। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ होगा। इसी कारण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।















