पटना की मुख्य सड़कों को दोनों किनारों से चमकदार बना दिया गया है। बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल्स, आलीशान इमारतें और सजी-धजी दुकानें इस शहर की बाहरी खूबसूरती को तो बढ़ा रही हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। पटना के कई इलाकों, विशेषकर कंकड़बाग जैसी कॉलोनियों में, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं, वहां खुले मैनहोल और जर्जर सड़कें लोगों के काफी कठिनयियों होती है ।
चकाचक सड़कों के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई
पटना की बाहरी सुंदरता के पीछे की हकीकत चौंकाने वाली है। मुख्य सड़कों के अलावा, शहर की अंदरूनी कॉलोनियों की हालत दयनीय है। कई मोहल्लों में सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं, खुले मैनहोल हादसों को न्योता दे रहे हैं, और हर बारिश में जलजमाव आम बात हो गई है। पटना की इस स्थिति में नागरिकों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी कठिनयियों का सामना करना परता है ।
खतरनाक खुले मैनहोल और जर्जर सड़कें
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कई इलाकों की सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं, जिससे राहगीरों को हिचकोले खाते हुए गुजरना पड़ता है। खुले मैनहोल हादसों को न्योता दे रहे हैं, क्योंकि मैनहोल के ढक्कन गायब हैं और प्रशासन का इस पर कोई ध्यान नहीं है। यह स्थिति लोगों के लिए बेहद खतरनाक है, क्योंकि किसी भी समय कोई व्यक्ति या वाहन इन मैनहोल में गिर सकता है।
नमामि गंगे प्रोजेक्ट के बाद बदतर स्थिति
नमामि गंगे प्रोजेक्ट के दौरान कई सड़कों को काटा गया था, लेकिन मरम्मत कार्य अधूरा रह गया। इस कारण बारिश के समय सड़कों पर जलजमाव होता है और टूटी-फूटी सड़कें वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनती हैं। सड़कों पर गिट्टियां बाहर आ चुकी हैं, जिससे सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है।
प्रशासनिक उपेक्षा से गुस्से में लोग
इस कॉलोनी में डॉक्टर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और राजनेता रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रशासनिक सुविधा यहां उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे हर दिन प्रशासन से इसकी शिकायत करते हैं, लेकिन उनकी मांगें अनसुनी रह जाती हैं।
पटना के नागरिकों का कहना है कि राजधानी की सड़कों को चमकाने के बजाय शहर की अंदरूनी सड़कों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाए ताकि सभी को एक सुरक्षित और सहज यात्रा का अनुभव हो सके।
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