बिहार न्यूज़: मुज़फ्फरपुर जिले के छपरा मेघ गांव की निवासी अनन्या शर्मा ने हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा आयोजित सिविल जज परीक्षा में 41वां रैंक हासिल किया है। यह सफलता उनके परिवार और पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है।
अनन्या शर्मा ने साबित कर दिया है कि संघर्ष और मेहनत से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से मुजफ्फरपुर जिले का नाम रोशन किया है। अनन्या अब राजस्थान में न्याय की व्यवस्था स्थापित करने के लिए तैयार हैं।
परिवार का योगदान
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अनन्या के पिता अनिल कुमार, जो पिछले तीन दशकों से गांव में एक निजी स्कूल चला रहे हैं, और मां रंजीला कुमारी, जो एक मध्य विद्यालय में शिक्षिका हैं, ने हमेशा बेटी को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। अनन्या ने अपने परिणाम आने पर सबसे पहले अपने माता-पिता को फोन किया, जो उनके लिए गर्व का क्षण था। पिता ने लोकल 18 को बताया कि अनन्या की प्रारंभिक शिक्षा गांव के निजी विद्यालय में हुई, और 12वीं कक्षा की पढ़ाई उन्होंने जिले के एसआरटी स्कूल से पूरी की। इसके बाद, 2020 में, अनन्या ने लॉयड लॉ कॉलेज, ग्रेटर नोएडा से पांच साल की लॉ की पढ़ाई पूरी की।
अनन्या का सपना
अनन्या ने लोकल 18 को बताया, "यह मेरा सपना था और मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की है। मेरे माता-पिता का सहयोग मेरे लिए हमेशा ताकत बना रहा है।" उन्होंने कहा कि अब वह जज बनकर इंसाफ का सही फैसला करेंगी। उनका यह सपना अब साकार हो चुका है, और उन्होंने अपनी मेहनत का फल पाया है।
प्रेरणा का स्रोत
अनन्या की कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर मन में दृढ़ संकल्प और मेहनत की भावना हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उनका कहना है, "जहां रहेंगे, वहीं रोशनी लुटाएंगे, किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता।" यह शब्द अनन्या की सोच और दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जो उन्हें औरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाते हैं।
अनन्या की सफलता ने न केवल उनके परिवार को गर्वित किया है, बल्कि पूरे जिले को भी प्रेरित किया है कि शिक्षा और मेहनत के माध्यम से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
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