22 अप्रैल 2025 को लखनऊ एक बार फिर प्रदर्शनकारियों की आवाज़ से गूंज उठा। UP 69 thousand up Teachers Recruitment मामले में आरक्षित वर्ग के सैकड़ों अभ्यर्थी राजधानी पहुंचे और विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। यह विरोध प्रदर्शन पिछले छह सालों से चले आ रहे उस लंबे संघर्ष की एक और कड़ी है जो अभी तक सुलझा नहीं है।
क्यों हो रहा है यह प्रदर्शन
यूपी : लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी नौकरी मांगने विधानसभा जा रहे थे। पुलिस उन्हें इस तरह टांग–टांगकर बसों में भरकर ले गई और ईको गार्डन में छोड़ आई। pic.twitter.com/TGmaol1MjQ
— Sachin Gupta (@Sachingupta) April 22, 2026
69000 शिक्षक भर्ती का मामला साल 2019 की सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा यानी ATRE से जुड़ा हुआ है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2020 और जनवरी 2022 में जारी हुई चयन सूचियों को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर नई मेरिट लिस्ट जारी की जाए। लेकिन इस आदेश पर अमल नहीं हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि इस भर्ती में 19 हज़ार सीटों पर आरक्षण का महाघोटाला हुआ है। वे पिछले तीन साल से यह आरोप लगाते आ रहे हैं। अब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं हुई जिससे उनका गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के डबल बेंच के फैसले के बाद 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी हुई लेकिन नियुक्ति आज तक नहीं मिली।
संबंधित खबरें (Also Read)
CBSE 10th Result 2026 Out: आसान तरीके से करें चेक, जानें पासिंग मार्क्स और जरूरी अपडेट

UPSC NDA 2026 परीक्षा कल, 60 मिनट पहले पहुंचना जरूरी-जानें सभी नियम और टाइमिंग

बड़ा फैसला! NCERT बना डीम्ड यूनिवर्सिटी, अब देगा UG-PG और PhD डिग्री

CTET Result 2026 में बड़ा झटका! सिर्फ 25% पास, पेपर 2 ने बिगाड़ा खेल

सुप्रीम कोर्ट में क्या चल रहा है
यह मामला सितंबर 2024 से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। पहली सुनवाई उसी वक्त हुई थी लेकिन उसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिलती रही। आंदोलन के नेता धनंजय गुप्ता और सुशील कश्यप का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से वकील भी ठीक से पैरवी नहीं कर रहा। जिसकी वजह से केस आगे नहीं बढ़ रहा और अभ्यर्थी बेरोजगार बैठे हैं। अभ्यर्थियों का मानना है कि सरकार जानबूझकर मामले को लटकाए रखना चाहती है ताकि दलित और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को उनका हक न मिले। यह आरोप गंभीर है और इसी वजह से आंदोलन को जनसमर्थन भी मिल रहा है।
प्रदर्शन का तरीका और पुलिस की कार्रवाई
बुधवार को अभ्यर्थी गले में झाड़ू और मटकी लटकाकर विधानसभा की तरफ बढ़े। यह उनके विरोध का प्रतीकात्मक तरीका था जिससे वे सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना चाहते थे। प्रदर्शन की भनक पहले से ही लग गई थी इसलिए प्रशासन अलर्ट मोड पर था। शिकोहाबाद, फिरोजाबाद और सुल्तानपुर समेत कई जिलों में अभ्यर्थियों के नेताओं को पहले ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया था। इसके बावजूद सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी लखनऊ पहुंचे। पुलिस ने विधानसभा के पास पहुंचे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें इको गार्डन ले जाया गया। अभ्यर्थियों के परिजन भी इस बार उनके साथ आए जिससे यह आंदोलन परिवारों की पीड़ा की आवाज़ बन गया।
आगे क्या होगा
यह मामला सिर्फ नौकरी का नहीं रहा, यह सामाजिक न्याय और आरक्षण की व्यवस्था का सवाल बन चुका है। छह साल से लड़ रहे अभ्यर्थी थके नहीं हैं लेकिन टूटने की कगार पर ज़रूर हैं। अब सबकी नज़र सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। अगर सरकार खुद पहल करे और कोर्ट में मज़बूती से अपना पक्ष रखे तो शायद इस मामले का हल जल्दी निकल सकता है। लखनऊ का यह प्रदर्शन एक संदेश है कि अभ्यर्थी अब और इंतज़ार के लिए तैयार नहीं हैं।
यह भी पढ़ें:- UPSC NDA 2026 परीक्षा कल, 60 मिनट पहले पहुंचना जरूरी-जानें सभी नियम और टाइमिंग







