सियासी हलचल तेज है, क्योंकि Bihar विधानसभा में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली सरकार बहुमत प्रस्ताव पेश करने जा रही है। इससे पहले महागठबंधन के विधायकों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पिछले घटनाक्रम को देखते हुए सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी कुछ विधायक गायब रहेंगे।

Bihar Politics: क्या है विधानसभा का गणित और क्यों बढ़ी चिंता

विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को भारी जीत मिली थी। 243 सीटों में से 202 सीटें एनडीए के खाते में गईं, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटों से संतोष करना पड़ा। इन 35 विधायकों में से भी चार विधायक एक अहम मौके पर अनुपस्थित रहे थे। इसका सीधा असर राज्यसभा चुनाव पर पड़ा था, जहां विपक्ष को नुकसान उठाना पड़ा।

बताया जाता है कि उस समय कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक संपर्क में नहीं थे। बाद में उन्होंने अलग-अलग कारण बताए, लेकिन तब तक राजनीतिक नुकसान हो चुका था।अब फ्लोर टेस्ट के समय फिर से वही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से महागठबंधन के भीतर सतर्कता बढ़ गई है।

क्या फिर बदल सकता है समीकरण? आगे की रणनीति

इस बार विपक्षी दल किसी भी तरह की चूक से बचना चाहते हैं। इसलिए व्हिप जारी करने को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है। अगर व्हिप जारी किया जाता है और विधायक अनुपस्थित रहते हैं, तो कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।Rashtriya Janata Dal और Indian National Congress दोनों ही अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात में सरकार के पास बहुमत है, लेकिन विपक्ष के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। अगर विधायक एकजुट नहीं रहते, तो राजनीतिक संदेश नकारात्मक जा सकता है।यह भी चर्चा है कि कुछ विधायक दबाव या रणनीतिक कारणों से दूरी बना सकते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

फ्लोर टेस्ट से पहले विधायकों की मौजूदगी या अनुपस्थिति बड़ा राजनीतिक संकेत दे सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सदन में कौन मौजूद रहता है और इससे क्या नया समीकरण निकलता है।

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