12 फरवरी 2026 को देशभर में विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर Bharat Bandh आयोजित किया गया है। इस हड़ताल का असर बैंकिंग सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन, सरकारी दफ्तरों और बाजारों पर देखने को मिल सकता है। संगठनों का कहना है कि यह कदम श्रम कानूनों, बिजली बिल और अन्य प्रस्तावित नीतियों के विरोध में उठाया गया है। आम लोगों को पहले से अपनी यात्रा और बैंकिंग कार्य की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
Bharat Bandh हड़ताल की वजह और मुख्य मांगें
देशव्यापी बंद को लेकर कई श्रमिक संगठन और किसान मंच एकजुट हुए हैं। बैंक कर्मचारियों के संगठन जैसे AIBEA, AIBOA और BEFI ने भी समर्थन की घोषणा की है। उनका तर्क है कि नए Labour Codes से कर्मचारियों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों ने भी बिजली बिल-2025, बीज बिल-2025 और अन्य प्रस्तावों पर आपत्ति जताई है।संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सभी कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग दोहराई है।
संगठनों का आरोप है कि कुछ नीतियां किसानों और मजदूरों पर आर्थिक बोझ बढ़ा सकती हैं। बिजली दरों में संभावित बदलाव और स्मार्ट मीटर को लेकर भी असंतोष जताया गया है। यह Bharat Bandh केवल एक दिन की हड़ताल नहीं, बल्कि श्रम अधिकार, कृषि नीति और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बहस का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आंदोलनों से सरकार और संगठनों के बीच संवाद की प्रक्रिया तेज होती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
क्या रहेगा बंद, क्या खुलेगा?
Bharat Bandh हड़ताल के कारण कई सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आंशिक रूप से बंद रह सकते हैं या सेवाएं बाधित हो सकती हैं। बाजार, थोक मंडियां और कुछ राज्यों में परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। विभिन्न शहरों में प्रदर्शन और रैलियां भी आयोजित की जा सकती हैं।हालांकि, आवश्यक सेवाएं जैसे अस्पताल, एम्बुलेंस, एयरपोर्ट और उड़ान सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की संभावना है। निजी कार्यालय, कुछ निजी स्कूल-कॉलेज और ऐप आधारित परिवहन सेवाएं (जैसे कैब सर्विस) कई स्थानों पर चालू रह सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे राष्ट्रीय स्तर के बंद का असर क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय प्रशासन और बैंक शाखाओं से ताजा जानकारी प्राप्त करें।देश में पहले भी इसी तरह के बंद हुए हैं, जिनका उद्देश्य नीतिगत बदलावों पर ध्यान आकर्षित करना रहा है। ऐसे आंदोलनों का दीर्घकालिक प्रभाव सरकार और संगठनों के बीच बातचीत की दिशा पर निर्भर करता है।
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