दुनियाभर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच कई देशों ने कम उम्र के बच्चों के लिए social media के इस्तेमाल पर सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों के बाद अब यूरोप के कई देश भी इस दिशा में नियम बनाने की तैयारी कर रहे हैं। भारत में भी केंद्र सरकार इस तरह के प्रतिबंधों पर विचार कर रही है, जिससे आने वाले समय में बच्चों के डिजिटल उपयोग पर असर पड़ सकता है।

किन देशों ने लगाए social media पर सख्त नियम और क्यों?

पिछले कुछ वर्षों में बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर कई रिपोर्ट सामने आई हैं। साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे मामलों में बढ़ोतरी ने सरकारों को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन लागू किया है। वहीं इंडोनेशिया ने भी कई प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के अकाउंट्स को सीमित करने का फैसला लिया है।

इन देशों ने न सिर्फ एक्सेस पर रोक लगाई है, बल्कि प्लेटफॉर्म्स को प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत करने, पेरेंटल कंट्रोल देने और लोकेशन ट्रैकिंग सीमित करने के निर्देश भी दिए हैं।यूरोप में स्पेन सहित कई देश इसी तरह के नियम लागू करने की योजना बना रहे हैं, जिससे यह मुद्दा अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।

भारत में क्या हो सकता है असर?

भारत में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आयु सीमा तय करने और बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रही है।टेक्नोलॉजी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने हाल ही में कहा कि डीपफेक और ऑनलाइन खतरों को लेकर कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में आयु आधारित नियम लागू किए जा सकते हैं।भारत में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स के करोड़ों यूजर्स हैं, जिनमें बड़ी संख्या किशोरों की है। ऐसे में अगर नए नियम लागू होते हैं, तो यह डिजिटल व्यवहार और कंटेंट उपभोग दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

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