बिथान प्रखंड क्षेत्र में पशु चिकित्सा सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन सख्त नजर आया है। Samastipur के सखवा स्थित प्रथम वर्गीय पशु अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे बीडीओ आफताब आलम ने अव्यवस्था और गंदगी पर नाराजगी जताते हुए तुरंत सुधार के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई, जिससे अब स्थानीय स्तर पर उम्मीद जगी है कि पशुपालकों को जल्द बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

Samastipur: निरीक्षण में सामने आई लापरवाही, बीडीओ सख्त

बीडीओ आफताब आलम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जहां उन्हें साफ-सफाई की खराब स्थिति और अव्यवस्था देखने को मिली। परिसर में गंदगी फैली हुई थी और नियमित सेवाओं का अभाव साफ नजर आ रहा था।उन्होंने मौके पर मौजूद पशु चिकित्सक को फटकार लगाते हुए कहा कि पहले भी सुधार के निर्देश दिए गए थे, लेकिन स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया। इस पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने का आदेश दिया।

ग्रामीणों ने भी बताया कि अस्पताल में अक्सर डॉक्टर अनुपस्थित रहते हैं, जिससे पशुओं का इलाज प्रभावित होता है। यही वजह है कि लोग लंबे समय से प्रशासन से शिकायत कर रहे थे।निरीक्षण के दौरान कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद थे, जिन्होंने अस्पताल को नियमित रूप से चालू रखने की मांग दोहराई।

अब पंचायत भवन से चलेगी सेवा, सुधार के निर्देश

बीडीओ ने यह भी निर्देश दिया कि जब तक अस्पताल की स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती, तब तक इसकी सेवाएं पंचायत सरकार भवन से संचालित की जाएं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पशुपालकों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।इसके अलावा, एक स्वास्थ्य कर्मी की रोजाना उपस्थिति अनिवार्य की गई है। पशु चिकित्सक ने भी भरोसा दिलाया कि वह सप्ताह में 2 से 3 दिन अस्पताल में मौजूद रहेंगे और सेवाओं को नियमित बनाएंगे।

एवरग्रीन नजरिए से देखें तो ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग पशुपालन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अस्पताल की खराब स्थिति सीधे उनकी आजीविका को प्रभावित करती है।बीडीओ ने कहा कि अगले 3 से 4 दिनों के भीतर व्यवस्था पूरी तरह सुधार ली जाएगी। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आगे कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस निरीक्षण के बाद प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है। अब देखना होगा कि दिए गए निर्देश कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं कब तक मिलती हैं।

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