नई दिल्ली में अगले सप्ताह होने जा रहे वैश्विक तकनीकी India AI Impact Summit 2026 आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सरकार और उद्योग जगत दोनों की नजर इस कार्यक्रम पर टिकी है क्योंकि यह ग्लोबल साउथ देशों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग का बड़ा मंच बनने जा रहा है। India AI Impact Summit 2026 में कई देशों के शीर्ष नेता, मंत्री और बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ भाग लेंगे, जिससे नीति, निवेश और तकनीक तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण घोषणाओं की उम्मीद है।
AI वैश्विक मंच पर भारत की डिजिटल भूमिका
भारत तेजी से डिजिटल इकोसिस्टम का केंद्र बनता जा रहा है। इसी कड़ी में India AI Impact Summit 2026 को ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा टेक संवाद माना जा रहा है। इसमें लगभग 15-20 राष्ट्राध्यक्ष, 50 से ज्यादा मंत्री और 40 से अधिक भारतीय व अंतरराष्ट्रीय CEO शामिल होंगे। इस स्तर की भागीदारी से साफ संकेत मिलता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि कूटनीति और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है।
इस आयोजन का मुख्य फोकस AI Governance, Responsible AI और Digital Public Infrastructure पर रहेगा। भारत पहले ही आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर जैसे मॉडल दुनिया के सामने पेश कर चुका है, इसलिए कई विकासशील देश भारत के अनुभव से सीखना चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे डेटा सुरक्षा, साइबर नियम और तकनीकी साझेदारी पर साझा ढांचा बन सकता है।साथ ही यह सम्मेलन स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी बड़ा अवसर होगा। भारतीय स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से सीधे बातचीत का मौका मिलेगा। अनुमान है कि हेल्थ-टेक, एग्री-टेक और एजु-टेक सेक्टर में नए समझौते सामने आ सकते हैं। यह आयोजन लंबे समय में भारत को AI innovation hub के रूप में स्थापित कर सकता है।
आम लोगों और उद्योग पर क्या होगा असर
इस शिखर सम्मेलन का असर केवल सरकार या कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग अब शिक्षा, खेती, स्वास्थ्य और रोजगार में तेजी से बढ़ रहा है। बैठक में डिजिटल स्किलिंग, automation और job transformation पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में AI नई नौकरियां भी पैदा करेगा और पारंपरिक नौकरियों का स्वरूप भी बदलेगा।कृषि क्षेत्र में smart farming, मौसम पूर्वानुमान और रोग पहचान तकनीक पर सहयोग बढ़ सकता है। वहीं हेल्थ सेक्टर में AI diagnosis और remote treatment को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर हो सकती है।सरकार का लक्ष्य सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीक पर जोर देना है ताकि नागरिकों का डेटा सुरक्षित रहे। इसी वजह से ethical AI और transparency जैसे मुद्दे एजेंडा में प्रमुख रहेंगे। इससे आम उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल सेवाएं और भरोसेमंद बनेंगी।कुल मिलाकर यह सम्मेलन केवल एक इवेंट नहीं बल्कि भविष्य की डिजिटल नीतियों का आधार बन सकता है। आने वाले समय में इसके फैसले शिक्षा, रोजगार और टेक उद्योग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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