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UP विधानसभा में CM का शायराना वार, सियासी बहस तेज

Reported by: Ground Repoter | Written by: Srota Swati Tripathy | Agency: SN Media Network
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योगी की शायरी: UP विधानसभा में सियासत का नया रंग खबर का सार AI ने दिया. न्यूज़ टीम ने रिव्यु किया.

  • मुख्यमंत्री योगी ने विधानसभा में शायरी से विपक्ष पर साधा निशाना।
  • उनकी शायरी सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी।
  • भारतीय राजनीति में शेर-ओ-शायरी संदेश देने का प्रभावी तरीका रही है।

उत्तर प्रदेश(UP) विधानसभा के बजट सत्र में उस वक्त राजनीतिक माहौल अचानक हल्का-फुल्का लेकिन तीखा हो गया जब मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए शायरी पढ़ दी। सदन में दिए गए इस बयान ने सियासी गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी। शायरी के जरिए उन्होंने सरकार के कामकाज पर उठ रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश की और इसे अपने प्रशासनिक प्रदर्शन से जोड़ा।

विधानसभा में शायरी के जरिए सियासी संदेश

सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष सरकार की नीतियों और फैसलों पर लगातार सवाल उठा रहा था। जवाब देते हुए UP CM Yogi Adityanath से जुड़े इस बयान ने बहस का रुख बदल दिया। उन्होंने कहा कि कई बार लोग वास्तविकता को देखने के बजाय आरोपों का सहारा लेते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने मशहूर पंक्तियां पढ़ीं — “उम्र भर यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पे थी आइना साफ़ करता रहा।”

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इस टिप्पणी को सत्ता पक्ष ने सरकार के कामों का बचाव बताया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक कटाक्ष माना। सदन में कुछ देर तक ठहाके भी लगे और फिर बहस अपने मूल मुद्दों पर लौट आई। भारतीय राजनीति में यह नया नहीं है कि नेता शेर-ओ-शायरी के जरिए संदेश देते हैं। इससे पहले भी कई संसद और विधानसभा सत्रों में कविता के माध्यम से जवाब देने की परंपरा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की भाषा आम जनता तक संदेश पहुंचाने का आसान तरीका होती है। जब बयान सरल और भावनात्मक हो, तो वह सोशल मीडिया पर तेजी से फैलता है और राजनीतिक संचार अधिक प्रभावी बनता है। यही कारण है कि यह बयान कुछ ही घंटों में चर्चा का विषय बन गया।

सियासत में भाषा और शैली की अहमियत

विधानसभा और संसद में भाषण केवल नीति बताने के लिए नहीं होते, बल्कि जनमत को प्रभावित करने के लिए भी होते हैं। राजनीतिक संचार में शेर-शायरी का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है क्योंकि यह जटिल मुद्दों को सरल तरीके से पेश करता है। यही वजह है कि यह घटना political debate का हिस्सा बन गई और लोगों ने इसे अलग-अलग नजरिए से समझा।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी टिप्पणियां अक्सर governance model और public perception को प्रभावित करती हैं। समर्थक इसे आत्मविश्वास और स्पष्ट संदेश मानते हैं, जबकि विरोधी इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताते हैं। मगर लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद का यह तरीका भी स्वीकार्य माना जाता है क्योंकि इससे बहस ज्यादा जनसुलभ बनती है।

आने वाले दिनों में budget session के दौरान और भी तीखी बहसें देखने को मिल सकती हैं। लेकिन यह घटना बताती है कि राजनीतिक मंच केवल नीतिगत चर्चा का स्थान नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति का मंच भी है। यही वजह है कि ऐसे बयान evergreen चर्चा का हिस्सा बन जाते हैं और लंबे समय तक राजनीतिक संदर्भों में याद किए जाते हैं।

यह भी पढ़ें:- UGC Regulations 2026 पर Yogi Adityanath का ऐतराज़, केंद्र से संवाद तेज

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विधानसभा में शायरी: सियासत का नया रंग या मुद्दों से भटकाव?


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Srota Swati Tripathy
Srota Swati Tripathy

जगन्नाथ की भूमि और नीले समंदर के किनारों से निकलकर झीलों के शहर भोपाल की एमसीयू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री कर रहे हैं। सीखने और समझने का दौर अभी भी जारी है। अब 'समस्तीपुर न्यूज़' के कंटेंट राइटर और अपने लेख के लिए जाने जाते हैं| ...और पढ़ें


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First Published : फ़रवरी 13, 2026, 06:46 अपराह्न IST

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