देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए आज का दिन खास रहा, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने परीक्षा से पहले मार्गदर्शन देने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम Pariksha Pe Charcha 2026 के नौवें संस्करण की मेज़बानी की। बोर्ड परीक्षाओं के ठीक पहले आयोजित इस संवाद में लाखों छात्र ऑनलाइन और ऑफलाइन जुड़े। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य परीक्षा के तनाव को कम करना, पढ़ाई के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाना और जीवन में संतुलन की अहमियत समझाना रहा।
Pariksha Pe Charcha: पढ़ाई को बोझ नहीं, विकास का साधन मानें छात्र
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा और परीक्षा जीवन को आगे बढ़ाने के साधन हैं, डर का कारण नहीं। उन्होंने छात्रों को केवल अंकों के पीछे भागने के बजाय सीखने की प्रक्रिया को समझने पर ज़ोर दिया। उनका कहना था कि वास्तविक सफलता तब मिलती है, जब ज्ञान के साथ-साथ कौशल भी विकसित हों और उन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लागू किया जा सके।
प्रधानमंत्री ने समय प्रबंधन, अनुशासन और आत्मविश्वास को परीक्षा की तैयारी के तीन अहम स्तंभ बताया। उन्होंने समझाया कि नियमित अध्ययन, छोटे-छोटे लक्ष्य और निरंतर अभ्यास से डर अपने-आप कम हो जाता है। बातचीत के दौरान यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि रचनात्मकता, संचार कौशल और भावनात्मक मजबूती जैसी क्षमताएँ पढ़ाई जितनी ही जरूरी हैं। यह दृष्टिकोण कार्यक्रम को केवल परीक्षा-केंद्रित न रखकर जीवन-केंद्रित बनाता है, जिससे यह हर साल प्रासंगिक बना रहता है।
तकनीक, कौशल और मानसिक संतुलन पर ज़ोर
प्रधानमंत्री ने तकनीक की भूमिका पर भी खुलकर बात की। उन्होंने माना कि डिजिटल टूल्स पढ़ाई को आसान बना सकते हैं, लेकिन उनके अत्यधिक उपयोग से ध्यान भटकने का खतरा भी रहता है। छात्रों को सलाह दी गई कि तकनीक को सहायक के रूप में अपनाएं, विकल्प के रूप में नहीं।उन्होंने समस्या-समाधान, क्रिटिकल थिंकिंग और क्रिएटिव अप्रोच जैसे स्किल्स को भविष्य के लिए अनिवार्य बताया। साथ ही यह भी कहा कि पढ़ाई के साथ शौक, खेल और विश्राम को समय देना मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
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इस संतुलन से न केवल परीक्षा की तैयारी बेहतर होती है, बल्कि लंबे समय तक सीखने की प्रेरणा भी बनी रहती है।कार्यक्रम में अभिभावकों और शिक्षकों को भी संदेश दिया गया कि वे तुलना और अनावश्यक दबाव से बचें। हर छात्र की सीखने की गति अलग होती है, इसे समझना और स्वीकार करना जरूरी है। शिक्षकों से आग्रह किया गया कि वे रटने के बजाय जिज्ञासा जगाने वाली शिक्षण पद्धतियाँ अपनाएं।
व्यापक भागीदारी और दीर्घकालिक प्रभाव
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कार्यक्रम से 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण जुड़े, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। यह मंच अब केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परीक्षा-पूर्व मानसिक तैयारी का भरोसेमंद साधन बन चुका है।
कार्यक्रम के संदेश छात्रों को यह समझाते हैं कि परीक्षा जीवन का एक चरण है, अंतिम पड़ाव नहीं। मेहनत, निरंतरता और सकारात्मक सोच से किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। इसी संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण के कारण यह पहल समय के साथ और अधिक प्रभावी होती जा रही है, और आने वाले वर्षों में भी छात्रों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।
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