Indian Rupee: बताते चले की 21 मई 2026 को करेंसी मार्केट में भारतीय मुद्रा ने मजबूत वापसी दर्ज की। बुधवार के मुकाबले गुरुवार सुबह रुपया डॉलर के खिलाफ तेजी के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में 52 पैसे तक मजबूत हो गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और RBI की सक्रिय रणनीति ने बाजार का माहौल बेहतर किया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में ग्लोबल संकेतों के आधार पर करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
Indian Rupee में मजबूती की बड़ी वजह क्या रही?
गुरुवार सुबह घरेलू मुद्रा ने निवेशकों को राहत दी। बाजार खुलते ही रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत स्तर पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों से लगातार दबाव में चल रही घरेलू करेंसी को इस बार अंतरराष्ट्रीय संकेतों से सपोर्ट मिला। खासकर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने बाजार की धारणा बदल दी। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए तेल सस्ता होने से देश के आयात बिल पर असर पड़ता है और इसका सीधा फायदा रुपये को मिलता है।
इसके साथ ही US ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में नरमी देखने को मिली। अमेरिकी बाजार में ब्याज दरों को लेकर चिंता थोड़ी कम हुई, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी को सपोर्ट मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड नीचे जाती है तो विदेशी निवेशकों का रुझान एशियाई बाजारों की तरफ बढ़ सकता है। यही कारण है कि Rupee against dollar की स्थिति में अचानक सुधार देखने को मिला।
RBI की हालिया गतिविधियां भी बाजार में चर्चा का विषय रहीं। रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय बैंक ने डॉलर की बिकवाली कर घरेलू मुद्रा को सपोर्ट देने की कोशिश की। इससे Currency Market में घबराहट कम हुई और ट्रेडर्स का भरोसा लौटा।
Currency Market पर कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड का असर
ग्लोबल मार्केट में इस समय सबसे ज्यादा नजर कच्चे तेल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों पर बनी हुई है। Crude oil softens होने का असर सीधे भारत जैसे देशों पर पड़ता है। तेल की कीमतें कम होने से महंगाई का दबाव घटता है और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। यही वजह रही कि गुरुवार को घरेलू मुद्रा में मजबूती का माहौल बना।















