Petrol Diesel Price Hike: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी गई। मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच तेल कंपनियों ने एक हफ्ते में दूसरी बार ईंधन महंगा किया है। इस बार पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 91 पैसे प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ है। नई कीमतों का असर दिल्ली, मुंबई समेत कई बड़े शहरों में देखने को मिला है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में उछाल आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।

Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल की नई कीमतों से बढ़ी चिंता

देश में ईंधन की कीमतों में हुई नई बढ़ोतरी के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल अब 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई थी। लगातार दूसरी बार हुए इस बदलाव ने परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर असर डालना शुरू कर दिया है।

मुंबई में भी पेट्रोल की कीमत 107 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। वहीं डीजल के दाम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और मध्य पूर्व के हालात बिगड़ने का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। इसका असर आने वाले दिनों में सब्जियों, दूध और जरूरी सामानों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से हर सेक्टर प्रभावित होता है। यही वजह है कि लोग अब सरकार और तेल कंपनियों से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

महंगाई और वैश्विक संकट का दिख रहा असर

पिछले कुछ महीनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध जैसे हालात के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का असर सीधे घरेलू बाजार में दिखाई देता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे महंगाई दर बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा। सरकार की तरफ से फिलहाल किसी राहत पैकेज या टैक्स कटौती की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

ईंधन की कीमतों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव खेती, उद्योग, सार्वजनिक परिवहन और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं तक पहुंचता है। ऐसे में यह मुद्दा आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण बन जाता है। देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें आम जनता के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार और युद्ध जैसे हालात का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और तेल कंपनियों के फैसलों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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