Swiggy-Zomato Orders: बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेक्टर को लेकर नई चिंता सामने आई है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब भारत के डिलीवरी नेटवर्क पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले दिनों में ऑनलाइन खाना मंगवाना पहले से महंगा हो सकता है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण डिलीवरी लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका असर ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। इसी बीच Swiggy Zomato orders को लेकर चर्चा तेज हो गई है क्योंकि कंपनियों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव बढ़ता जा रहा है।

Swiggy-Zomato Orders: ईंधन महंगा होने से बढ़ी डिलीवरी लागत

देश में हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है जो बड़े स्तर पर दोपहिया वाहन आधारित डिलीवरी नेटवर्क पर निर्भर हैं। फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर में हर ऑर्डर पर अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक ऑर्डर की डिलीवरी लागत में औसतन 40 से 50 पैसे तक का अतिरिक्त बोझ आ सकता है। देखने में यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन लाखों ऑर्डर के स्तर पर यह कंपनियों के लिए बड़ा आर्थिक दबाव बन जाता है। वर्तमान में फूड डिलीवरी पर प्रति ऑर्डर लगभग 55 से 60 रुपये तक का खर्च आता है।

डिलीवरी पार्टनर भी लगातार बढ़ते ईंधन और वाहन रखरखाव खर्च से परेशान हैं। कई शहरों में गिग वर्कर्स ने प्रति किलोमीटर भुगतान बढ़ाने की मांग शुरू कर दी है। कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। उनका कहना है कि अगर कमाई नहीं बढ़ी तो बड़ी संख्या में डिलीवरी पार्टनर इस क्षेत्र को छोड़ सकते हैं।

ग्राहकों पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों के अनुसार यदि ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियां धीरे-धीरे डिलीवरी शुल्क बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा न्यूनतम ऑर्डर राशि में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि अभी कंपनियों की ओर से किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां आमतौर पर बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाती हैं। इनमें डाइनैमिक प्राइसिंग, रूट ऑप्टिमाइजेशन और ऑफर में बदलाव शामिल होते हैं। भविष्य में कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने और नई तकनीकों पर भी ज्यादा ध्यान दे सकती हैं ताकि ईंधन पर निर्भरता कम हो सके।

भारत में ऑनलाइन फूड और क्विक डिलीवरी बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ लागत का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो आने वाले महीनों में ग्राहकों को ऑनलाइन ऑर्डर के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। डिलीवरी कंपनियों, गिग वर्कर्स और ग्राहकों तीनों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले समय में ईंधन बाजार की स्थिति ही तय करेगी कि ऑनलाइन खाना मंगवाना कितना महंगा होगा।

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