मुख्य चुनौतियाँ और सरकारी प्रयास
भूमि से जुड़े पुराने दस्तावेजों को समझने में कैथी लिपि एक बड़ी चुनौती बन गई है। हालांकि, सरकार ने अब सर्वेक्षण टीम को कैथी लिपि का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है। विदित हो कि स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों के शासनकाल में कैथी लिपि में खतियान तैयार किए गए थे, और आज उन्हीं दस्तावेजों को पढ़ने में समस्या आ रही है।
ऑनलाइन भू-लगान में समस्या
इसके साथ ही, ऑनलाइन भू-लगान रसीद काटने में भी लोगों को समस्याएं आ रही हैं। धीमी इंटरनेट सेवा के कारण वेबसाइट ठीक से काम नहीं कर रही है, जिससे भू-लगान जमा करने और रजिस्टर 2 की रिपोर्ट देखने में कठिनाइयाँ हो रही हैं। कई बार आवेदन के साथ कागजात अपलोड करने में भी अत्यधिक समय लग रहा है। इस दौरान दलाल और बिचौलिए लोगों को ठग रहे हैं, जो वंशावली बनाने के नाम पर 200 से 300 रुपये तक वसूल रहे हैं।
कैथी लिपि का प्रशिक्षण
सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कैथी लिपि प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। बेगूसराय संग्रहालय में आयोजित कैथी लिपि प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रशिक्षकों को अब भूमि सर्वेक्षण के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का कार्य सौंपा गया है। इस कार्यक्रम के तहत पश्चिमी चंपारण, दरभंगा और समस्तीपुर जिलों में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। कैथी लिपि विशेषज्ञ, प्रीतम कुमार, जो समस्तीपुर के निवासी हैं और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से कैथी लिपि में पीएचडी कर रहे हैं, इस प्रशिक्षण का नेतृत्व कर रहे हैं।
इस तरह, बिहार में भूमि सर्वेक्षण का काम तेजी से आगे बढ़ाने और दस्तावेज़ संबंधी कठिनाइयों को हल करने के लिए प्रयास जारी हैं।
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