उत्तर प्रदेश की राजनीति और विकास की दिशा तय करने वाला राज्य का अगला बजट अब औपचारिक रूप से तैयार हो चुका है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मंगलवार को विधान भवन स्थित अपने कार्यालय में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। Uttar Pradesh Budget बुधवार, 11 फरवरी को सुबह 11 बजे उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार इसे जन-आकांक्षाओं से जुड़ा और विकासोन्मुख बजट बता रही है, जिस पर राज्य की जनता और राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।
विकास और सुशासन पर केंद्रित Uttar Pradesh Budget की तैयारी
सरकार के अनुसार, Uttar Pradesh budget 2026-27 का फोकस राज्य के समग्र विकास, बेहतर प्रशासन और आम लोगों की जरूरतों पर रहेगा। बजट पर हस्ताक्षर करने के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का रोडमैप है। बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था और निवेश के क्षेत्र में जो गति पकड़ी है, उसे आगे बढ़ाने की कोशिश इस बजट में दिख सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और शहरी-ग्रामीण संतुलन पर खास ध्यान दिया जा सकता है। साथ ही, किसानों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों को और मजबूत करने की संभावना जताई जा रही है। यह बजट ऐसे समय आ रहा है, जब राज्य सरकार अपने विकास मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण के रूप में पेश करना चाहती है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर क्या रह सकती है प्राथमिकता
सूत्रों के मुताबिक, बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों के लिए आवंटन बढ़ाया जा सकता है। सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधार, डिजिटल शिक्षा, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने जैसे कदम इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही, राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए MSME सेक्टर, स्टार्टअप्स और निवेश-friendly नीतियों पर जोर रहने की उम्मीद है।
एलएसआई संकेतकों की बात करें तो state budget highlights, infrastructure development, public welfare schemes जैसे मुद्दे इस बजट की धुरी बन सकते हैं। वहीं हिंदी संदर्भ में जनकल्याण योजनाएं और विकास की प्राथमिकताएं जैसे विषय जनता के लिए खास मायने रखते हैं। बजट से यह संकेत देने की कोशिश होगी कि सरकार विकास के साथ-साथ सामाजिक संतुलन को भी बनाए रखना चाहती है।
विधानसभा में पेशी के बाद बढ़ेगी राजनीतिक हलचल
बजट पेश होने के बाद विधानसभा में इस पर व्यापक चर्चा होना तय है। सत्तापक्ष जहां इसे अपनी उपलब्धियों का प्रतिबिंब बताएगा, वहीं विपक्ष बजट की कमियों और जमीनी हकीकत को लेकर सवाल उठा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बजट आने वाले समय में राज्य की नीतियों और प्राथमिकताओं की दिशा तय करेगा।जनता की नजर इस बात पर भी रहेगी कि महंगाई, रोजगार और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर सरकार क्या ठोस कदम सुझाती है।
कुल मिलाकर, यह बजट न सिर्फ आर्थिक दस्तावेज होगा, बल्कि सरकार और जनता के बीच भरोसे का पैमाना भी बनेगा। आने वाले दिनों में इसके प्रावधानों और घोषणाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि राज्य सरकार विकास के अगले चरण को कैसे आकार देना चाहती
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