National Testing Agency (NTA) ने UGC NET दिसंबर सत्र की सबसे अहम परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया। इस नतीजे के साथ लाखों अभ्यर्थियों का इंतज़ार खत्म हुआ है। जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार कट-ऑफ, चयन प्रतिशत और विषयवार परिणामों ने शिक्षा जगत में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपना स्कोरकार्ड और कट-ऑफ विवरण देख सकते हैं।
UGC NET परीक्षा का आयोजन और कुल भागीदारी का पूरा ब्योरा
UGC NET दिसंबर 2025 सत्र की यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की गई थी। देशभर के 283 शहरों में स्थित 663 परीक्षा केंद्रों पर कुल 85 विषयों के लिए यह एग्जाम कराया गया। परीक्षा 31 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 के बीच 11 शिफ्टों में संपन्न हुई।
इस सत्र के लिए कुल 9,93,702 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 7,35,614 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। खास बात यह रही कि महिला उम्मीदवारों की भागीदारी सबसे अधिक रही। कुल आवेदकों में लगभग 59 प्रतिशत महिलाएं थीं, जो शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी का संकेत देता है।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र, प्रोविजनल आंसर-की और कैंडिडेट रिस्पॉन्स शीट पहले ही सार्वजनिक कर दी गई थीं, जिससे अभ्यर्थियों को मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा बना रहा।
कट-ऑफ, चयन आंकड़े और आगे की राह
इस सत्र में ugcnet.nta.ac.in के तहत कट-ऑफ अंक अपेक्षाकृत ऊंचे रहे। जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए सबसे अधिक कट-ऑफ प्राकृत विषय में दर्ज किया गया, जहां अनारक्षित श्रेणी के लिए 248 अंक रहे। इसके बाद बौद्ध और जैन अध्ययन में 244 तथा फ्रेंच विषय में 240 अंक का कट-ऑफ रहा।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कुल 5,141 उम्मीदवार JRF के लिए चयनित हुए हैं। वहीं 59,821 अभ्यर्थी असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पात्र घोषित किए गए हैं। इसके अलावा 1,17,058 उम्मीदवार केवल पीएचडी प्रवेश के लिए योग्य पाए गए हैं।
जो उम्मीदवार सफल हुए हैं, उन्हें जल्द ही डिजिटल माध्यम से पात्रता प्रमाणपत्र और फेलोशिप अवॉर्ड लेटर उपलब्ध कराए जाएंगे। यह परिणाम न केवल शैक्षणिक करियर के नए अवसर खोलता है, बल्कि उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में देश की दिशा भी तय करता है।
क्यों यह परिणाम लंबे समय तक अहम रहेगा?
यह परिणाम केवल एक परीक्षा का नतीजा नहीं है, बल्कि यह भारत में उच्च शिक्षा, रिसर्च कल्चर और शिक्षकों की गुणवत्ता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेतक है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय नियुक्तियों, पीएचडी दाखिलों और शोध परियोजनाओं में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
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