QR Code: वैज्ञानिकों ने डेटा स्टोरेज की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रिसर्चर्स ने ऐसा माइक्रो टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम बनाया है जो बैक्टीरिया से भी छोटा है और फिर भी जानकारी को हजारों साल तक सुरक्षित रख सकता है। इस खोज ने भविष्य के डिजिटल आर्काइव और सुरक्षित डेटा संरक्षण के तरीके बदलने की उम्मीद जगा दी है। खास बात यह है कि इस नई तकनीक में QR Code का प्रयोग किया गया है, लेकिन पारंपरिक उपयोग से बिल्कुल अलग उद्देश्य के लिए।

QR Code: दुनिया का सबसे छोटा डेटा स्टोरेज सिस्टम कैसे बना

रिसर्च टीम ने अल्ट्रा-थिन क्रोमियम नाइट्राइड सिरेमिक लेयर पर माइक्रो-पैटर्न उकेरकर यह सिस्टम तैयार किया। इसकी मोटाई केवल लगभग 15 नैनोमीटर बताई गई है। इतना सूक्ष्म डिजाइन बनाने के लिए आयन-बीम नैनो-फैब्रिकेशन तकनीक का उपयोग किया गया, जिसे आधुनिक nano technology का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।इस माइक्रो-स्टोरेज पैटर्न का कुल आकार 1.98 वर्ग माइक्रोमीटर है, यानी एक बैक्टीरिया से भी छोटा। इसे देखने के लिए सामान्य कैमरा या माइक्रोस्कोप नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की जरूरत पड़ती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह ultra data storage तकनीक भविष्य के आर्काइव सिस्टम में काम आ सकती है।शोधकर्ताओं का कहना है कि इसी तरह के माइक्रो पैटर्न से एक A4 शीट पर लगभग 2TB तक की जानकारी सेव की जा सकती है। खास बात यह है कि इसे बिजली की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए long term storage के लिए यह सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जा रहा है। इसी वजह से विशेषज्ञ इसे डिजिटल युग का “स्टोन आर्काइव” भी कह रहे हैं।

हजारों साल तक सुरक्षित रहेगा डेटा, क्या होंगे उपयोग

QR Code: इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसका सिरेमिक बेस्ड स्टोरेज है। सिरेमिक मटेरियल अत्यधिक तापमान, नमी और रेडिएशन से भी सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस माध्यम में रखा गया डेटा सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों साल तक सुरक्षित रह सकता है।भविष्य में इसका इस्तेमाल सरकारी दस्तावेज, सांस्कृतिक रिकॉर्ड, ऐतिहासिक पांडुलिपि और वैज्ञानिक रिसर्च को संरक्षित रखने में किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए स्पेस मिशन में भी ऐसी तकनीक भेजी जा सकती है ताकि पृथ्वी की जानकारी लंबी अवधि तक सुरक्षित रहे। इस तरह के archival technology सिस्टम पृथ्वी से बाहर डेटा भेजने में भी सहायक होंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक हार्ड-ड्राइव और क्लाउड सर्वर ऊर्जा पर निर्भर होते हैं, जबकि यह स्थायी डेटा संरक्षण का समाधान देता है। इसलिए इसे डिजिटल हेरिटेज संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह खोज आने वाले समय में डेटा सुरक्षा, साइबर आर्काइव और ज्ञान संरक्षण के तरीकों को पूरी तरह बदल सकती है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक शिक्षा, शोध और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए आधार बन सकती है, जिससे मानव सभ्यता की जानकारी लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेगी।

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