दरभंगा के वीमेंस कॉलेज में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य प्रोफेसर सुनीता सिन्हा ने की और इसे मनोविज्ञान विभाग के नेतृत्व में आयोजित किया गया। सेमिनार का मुख्य विषय था "कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मकता।"
स्वयं से प्रेम और सकारात्मकता की अहमियत
सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. सुनीता सिन्हा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि हम स्वयं से प्रेम करें और कार्यस्थल पर सकारात्मक सोच के साथ काम करें। यह हमें न सिर्फ मानसिक रूप से सशक्त बनाता है, बल्कि कार्यक्षमता को भी बढ़ाता है।
मानसिक स्वास्थ्य एक वैश्विक चुनौती
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मनोविज्ञान विभाग की डॉ. कविता वर्मा ने इस विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक विश्वव्यापी समस्या बन चुकी है। लोग दिन-प्रतिदिन बढ़ते तनाव और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं, जो उनके कामकाज और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है।
अनैतिक व्यवहार और लालच मानसिक स्वास्थ्य को कर रहे प्रभावित
प्रो. अरुण कुमार कर्ण ने कहा कि आजकल लोग अनैतिक व्यवहार और लालच के कारण मानसिक रूप से अस्वस्थ हो रहे हैं। यह न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
कोविड-19 ने मानसिक समस्याओं को किया उजागर
प्रो. सोनी सलोनी ने कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि इस दौरान मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। लंबे समय तक घर में बंद रहने और सामाजिक दूरी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला।
सभी उम्र के लोग प्रभावित
डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने कहा कि मानसिक समस्याओं से कोई भी उम्र अछूती नहीं है। चाहे वह बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग, हर वर्ग के लोग मानसिक दबाव और तनाव का सामना कर रहे हैं। आधुनिक तकनीकी उपकरण और कार्य का अत्यधिक दबाव भी इसका बड़ा कारण है।
कार्यक्रम का संचालन काजल श्रीवास्तव और पूनम कुमारी ने किया। इस मौके पर कई छात्रों ने भी अपने विचार साझा किए और मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाने के लिए कॉलेज ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
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