पाकिस्तान की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व प्रधानमंत्री Pakistan, Imran Khan की सेहत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर दावा किया गया है। उनके वकील ने अदालत को बताया कि दाहिनी आंख की 85 प्रतिशत रोशनी जा चुकी है और अब केवल 15 प्रतिशत विज़न बचा है। आरोप है कि जेल प्रशासन को कई बार शिकायत के बावजूद समय पर इलाज नहीं मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊंचाई पर है। स्वास्थ्य को लेकर उठे सवालों ने जेल प्रबंधन और मानवाधिकार मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।
Pakistan: सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? मेडिकल बोर्ड का आदेश
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील सलमान सफदर ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री की आंखों में शुरुआत में कोई बड़ी समस्या नहीं थी। लेकिन समय के साथ दाहिनी आंख में धुंधलापन बढ़ता गया। कथित तौर पर खून के थक्के बनने से विज़न लगातार कम होता गया।अदालत को बताया गया कि अदियाला जेल में कई बार मेडिकल शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद तीन महीने तक विस्तृत Eye Examination नहीं कराया गया। जब विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच हुई, तब तक काफी नुकसान हो चुका था। हालिया मुलाकात में आंखों से पानी आने और दर्द की शिकायत भी बताई गई।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत Medical Board बनाने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि रिपोर्ट जल्द पेश की जाए ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके। यह कदम Political Crisis के बीच एक अहम न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अंडरट्रायल या कैदी को समय पर इलाज मिलना बुनियादी अधिकार है। ऐसे मामलों में Medical Negligence के आरोप गंभीर माने जाते हैं।
जेल प्रशासन पर सवाल, राजनीति में बढ़ी हलचल
इस घटनाक्रम के बाद देश की सियासत में नई हलचल देखी जा रही है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल स्वास्थ्य का मामला नहीं, बल्कि Human Rights से जुड़ा मुद्दा है। वहीं विरोधी दल इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं।जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोपों ने बहस तेज कर दी है। यदि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में इलाज में देरी की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय हो सकती है। दूसरी ओर, सरकारी पक्ष का कहना है कि सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं और जांच प्रक्रिया नियमित रूप से चल रही थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। पाकिस्तान की राजनीति में पहले भी स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे संवेदनशील रहे हैं। अदालत का रुख यह संकेत देता है कि न्यायपालिका इस मामले को गंभीरता से देख रही है।आगे की सुनवाई और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर स्थिति साफ होगी। फिलहाल, देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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