देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। Reserve Bank of India(RBI) ने मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला लिया है। गवर्नर Sanjay Malhotra ने बुधवार सुबह इस फैसले की जानकारी दी। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है, क्योंकि इससे होम लोन, कार लोन और अन्य EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।

रेपो रेट स्थिर रहने से क्या बदलेगा?

केंद्रीय बैंक के इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिनके लोन रेपो रेट से जुड़े हुए हैं। जब रेपो रेट नहीं बदलता, तो बैंकों की लेंडिंग दरें भी स्थिर रहती हैं। इसका मतलब साफ है कि आपकी EMI फिलहाल बढ़ने वाली नहीं है।गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति ने ‘तटस्थ रुख’ बनाए रखने का फैसला किया है। यानी अभी न तो दरों में कटौती की जा रही है और न ही बढ़ोतरी।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में महंगाई नियंत्रण में है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति संतुलित बनी हुई है।इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलेगी, जो पहले से ही बढ़ती लागत और महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं।

अर्थव्यवस्था की स्थिति और आगे की दिशा

भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला स्थिरता बनाए रखने के लिए लिया गया है, ताकि बाजार में अचानक कोई झटका न आए।एवरग्रीन नजरिए से देखें तो रेपो रेट एक ऐसा टूल है, जिसके जरिए केंद्रीय बैंक महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो दरें बढ़ाई जाती हैं और जब अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना होता है, तो दरें घटाई जाती हैं।

इस बार रेपो रेट को स्थिर रखने का मतलब है कि बैंकिंग सिस्टम और बाजार दोनों को स्थिरता का संदेश दिया गया है।आने वाले समय में अगर महंगाई और घटती है, तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना बन सकती है। वहीं, अगर वैश्विक परिस्थितियां बिगड़ती हैं, तो नीतियों में बदलाव भी संभव है।

फिलहाल आम लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। EMI स्थिर रहेगी और आर्थिक माहौल में संतुलन बना रहेगा। अब अगली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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